Saturday, December 31, 2011

नया साल 


गुज़र गया जो कल,
याद आता है हर वोह पल/


याद है हर वो शाम, 
जो किया था दोस्तों के नाम/


ज़िन्दगी ने दिए कुछ नए मंजिल,
जिन राहों पर हुए कुछ खुशीआं हासिल/


जितने पल बिताये बच्चों को पढ़ाते ,
उतने ही पल बीताये खुद बच्चे बनते/


वो लड़ना झगड़ना वो छेड़ छाड़,
बन गया है सुहाना याद/


बिताये सभी पल अच्छे बुरे,
ज़िन्दगी ने थामा जब भी हम गिरे/ 


गुज़रा जो साल वो था दो हज़ार ग्यारा, 
दे गया वो ज़िन्दगी को किनारा /


२०११ बना ज़िन्दगी का ख़ास हिस्सा,
काश २०१२ का भी हो येही किस्सा /


आया है नया साल संग लेकर अपने ही कुछ पल,
पर भुला ना पाएंगे गुज़रा जो कल/   :) 


नए साल की हर्थिक सुभ कामनाये :)

Monday, December 5, 2011

दोस्त- दोस्ती 


दिल ने आवाज़ दी,ये अपने लगते  है /
मैंने पुछा क्या हम दोस्त बन सकते है?


दोस्ती हुई झगडे भी होते रहे/
दोस्ती के रंग गहरे होते गए/


पर तब किसी ने मुझसे पूछा,
क्यों लगता है ये दोस्त सच्चा?
ना था कोई जवाब जो लगता मुझे अच्छा/


दिल हुआ उदास, डरता है करते आभास/
ना जाने क्यों दोस्त होते है इतने ख़ास/
क्या वो कभी समझेंगे दिल की आवाज़?


thanks to someone who asked me this question for i was angry on someone and some one else questioned our friendship but must thank that person who asked this question may be for the inspiration if at all this is good :P