इंतज़ार ...........
सुहाना है मौसम
बारिश के बूंदों की ये सरगम
हवा भी चले है मद्धम
अनोखा लगे ये संगम
झूमने लगा है मन भुलाके अपने सारे घम
चाहे साथ हो कोई हमदम
हमारी नैनों में है शर्म
आपकी इंतज़ार में आँखें है नम
इस प्रकृति के मंडप में एक हो जाए हम
भुलाके सारी दुनिया इस रिश्ते की मिठास में ही खो जाए हम