Sunday, January 15, 2012

शुभ संक्रान्ती..........


रंगों से सजी है  रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/


है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/


हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/


हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/


तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/


न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/ 


गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/


न है  पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान, 
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/ 


है ये हर शहर वासी की कहानी, 
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................


संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)