Thursday, March 28, 2013

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लड़की पर ज़ुल्म करने वाले चोर 
फिर भी कहते हो उसे ही कमज़ोर????

अब हमे है दुनिया को बताना 
कमजोरी क्या है ये हमने ना जाना 

क्यों सहते हो इतना ज़ुल्म 
जब न किया है कोई जुर्म 

गलत है किसी और के करतब 
ना है तुम्हारे आंसुओं का कोई मतलब 

कहाँ गयी तुम्हारे चेहरे की हसी?
क्यों है कर ग़म चेहरे पे फसी??

किस बात की सज़ा तुम्हे मिलती 
जब ना की है तुमने कोई गलती 

क्यों देते हो अपने आप को सज़ा??
क्या मिलता है तुम्हे इसमें मज़ा 

है तुम्हे भी न्याय का अधिकार 
किसी और के लिए ना करो अपनी ज़िन्दगी बेकार 

बढ़ाके तो देखो अपना हाथ 
हम सब आजायेंगे देने तुम्हारा साथ 

करते है तुम्हारे ख़ुशी की कामना 
चलो करते है सच का सामना 
अब बस न्याय को है तुम्हारे आँचल से बांधना 
अपनी ख़ुशी के लिए हमे ही है लड़ना 
तुम्हारी ज़िन्दगी से अब सब को है सीखना 
साथ मिलकर अब हमे है आगे बढ़ना 
ना है हम कमज़ोर ये है सबको दिखाना................

Thursday, March 14, 2013

एम् बी ऐ का सफ़र 

सफ़र का पहला दिन 
शुरू हुआ क्यों एम् बी ऐ के जवाब के बिन 

ढूंढना तो था इस सवाल का जवाब 
पर वक़्त ने बना दिया हमे ज़िन्दगी का नवाब 
बुन ने लगे थे अलग ही ख्वाब 

वक़्त ने बिछादिया खुशियों का ढेर 
न कर सका उसका तोल कोई भी सेर 

समा लिया था यादों की दुनिया 
लेकिन अलग था  हकीकत का आशियाँ 

इसी मस्ती में ना जाने कैसे गुज़र गए दिन 
मन के तरंग में सतरंगी पलछिन 

किताब के हर पन्ने पे है यादों की छवि 
हर पल ने बना दिया हमे और भी अनुभवी 

दोस्तों से हर झगडे की याद भी ला देगा चेहरे पे हसी 
ऐसी गहरी है दिल में यादें बसी 

अब बस रह गए है चंद  पल 
ना जाने क्या लाएगा आने वाला कल 

छात्र से बन जायेंगे पेशेवार 
न होगी रंगों की ये बहार 

पीछे मुड के जो हमने देखा 
हाँ हमने है बहुत कुछ सीखा 
लेकिन उस पहले दिन के सवाल का जवाब आज भी है फीखा 
अब कोई हमसे पूछे क्यों एम् बी ऐ तो जवाब मिलेगा तीखा 



Tuesday, March 12, 2013

टेक्नोलॉजी की दुनिया 

जनम से मरण तक का सफ़र 
कंप्यूटर की दुनिया में आता है नज़र 
कभी सोचा क्या होगा इसका असर??

सिर्फ जानती हूँ क्या  है माँ की कोक 
बाहर मना रहे है लड़की होने का शोक 
टेक्नोलॉजी ना कर पाया इस कुरीति को रोक 

ना तय किया उसके लिए कोई नाम 
पर ये तय कर लिया हासिल करना है उसे कौनसा मुकाम 

खेल खुद से है वो अनजान 
कंप्यूटर की खेल में लगा देते है अपनी जान 

दोस्तों से नहीं होती आमने सामने बात 
बस आभासी दुनिया में ही है सबका साथ 

न रही बचपन न योवन की सुन्दरता 
टेक्नोलॉजी नहीं जानता है कोई भी पहलु की महानता 

गुज़र जाती है युही ज़िन्दगी का सफ़र 
ना रहती है कोई यादों की लहर 

शादी है दो दिलों का अटूट रिश्ता 
वो भी है टेक्नोलॉजी की दुनिया में पिस्ता 

हद हो जाती है जब अपनों का साथ छूटने का ग़म 
टेक्नोलॉजी से ही जताते है शोक अपने ही हुम्दुम 

 समझ नहीं आता हम मशीन है या इन्सां 
टेक्नोलॉजी की दुनिया ही क्यों है अपनी पहचान 
कहाँ खो रहे है अपनेपन के निशाँ???

माना टेक्नोलॉजी है आज की दुनिया की ज़रुरत 
पर क्या वही है इस ज़िन्दगी की वजूद और शाशक???