Sunday, December 2, 2012


यादों का सफ़र ............ :) 


ले चलती हूँ वक़्त के उस पार 
जहाँ थी ज़िन्दगी में खुशियों की खुमार 
हर लम्हा था सुनेहरा उपहार 
देखी भावनाओं की बहार 
दिखे सबके चेहरे हज़ार 

सफ़र में पहला था आगरा 
ताजमहल की सुन्दरता ने किया दिल को बावरा 
प्यार था हवा में गहरा 

पहुंचे हम मथुरा 
कान्हा का खेल बड़ा ही न्यारा 
मलाई और लस्सी की बेहती धारा 

फिर चल पड़े राजधानी की ओर 
त्याग के चिंगारी की जोर 
पार्लियामेंट की शोर 
शांति के है वहां कई चोर 


अगला  पड़ाव था  शिमला 
ठण्ड ने लगाया स्वागत का पहरा 
सबने बाँधा कफ्तान का सेहरा 

कुफरी में की गुड सवारी 
हिमालय की शिखर दिखी प्यारी 

पहुंचे जब हम मनाली 
बन गए बर्फ की प्याली 
बीता भुलाकर सबके दिलों में अपनेपन की भावनाएं खिली 

अम्रित्सर की चमक 
पंजाबी भाई चारे की  महक 

वागाह बॉर्डर पर हिन्दुस्तानी की दहाड़ 
बन गयी दिल में गर्व की पहाड़ 

मिला कई सुन्दर दृश्यों को देखने का मौका 
अपनों का साथ सबसे अनोखा 

गुरुओं की साथ सबसे निराली 
जगाई दिल में ख़ुशी की कव्वाली 

आपका गुस्सा और प्यार 
थी आपके अपनेपन की बहार 
आप ना होते तोह न होता हमारा सफ़र यादगार 
करते रेह्जायेंगे ऐसे सफ़र का जीवन भर इंतज़ार 

सफ़र हुआ ख़तम
सबकी आँखें है नम 
यादोँ की बहार दिल में लिए हम 
जी जायेंगे युही हम....................



Tuesday, November 13, 2012

WAQT NAHI 

suraj ki pehli kiran
jagaye dil mein umang
lekin sukriya ada karne ka
WAQT NAHI

har woh chandni raat
jaane humare dil ki har baat
lekin apne hi dil ka haal sunne ka 

WAQT NAHI

banaye hai kai rishtey
choot gaye banke kai kishtey
un kishton ko jodne ka
WAQT NAHI

risthon se naata choota
doston se pyaar toota
in toote dilon ko milane ka
WAQT NAHI

amaavasya ki raat
diyon ki roshni hoti hai saath
likin dil ke andhere ko door karne ka
WAQT NAHI

na koi rishta na koi dosti
na rahi dilon mein woh masti
ab kisi se kya kahe
jab apne hi zindagi mein apne liye
WAQT NAHI

Thursday, November 1, 2012

ख्वाइश .......

आया मन में एक अजीब ख्याल ,
था अपने आप से एक सवाल /

खयालो को मिल गया एक ज़रिया ,
कागज़ बन गया मेरा सहारा /


मनुष्य का रूप जो है लिया ,

दिल को है तनहा पाया ,
आसुओं को है अपनाया, 
क्या येही है मानव रूप की माया?

अगर में कलम होती ,
कवी के हाथों में शोभा देती /

अगर कागज़ होती 
बच्चे की हात में नाँव बनके ख़ुशी बटोरती 

अगर फूल होती ,
चंद पल के जीवन में कई दिल लुभाती /

अगर कोई खिलौना होती ,
खेलने वाले की मासोमिअत में खो जाती /

अगर बरसात के रूप में बहती ,
कई दिलों की तन्हाई की साथी बनती/ 

अगर होती कोई परिंदा,
उड़ जाती कहके सबको अल्विदा/ 

लेकिन मानव रूप मैं क्या है मैंने पाया??
टूटे ख्वाबोँ को पूरा करने का है कोई ज़रिया ???

में तो चाहू कलि से भूल बनू ,
चन्द पलों की ज़िन्दगी में दिलों में प्यार भरूं /

कुछ और तो न चाहू ,
चंद  पल जीयु और मुर्झाऊ ,
दिल की सुकून अपने साथ ले जाऊ /

ख्वाइशों से भरा ये बावरा मन,
ना अपनाना चाहे ये जीवन.........

Monday, October 8, 2012



इंतज़ार ...........


सुहाना है मौसम 
बारिश के बूंदों की ये सरगम 
हवा भी चले है मद्धम 
अनोखा लगे ये संगम 
झूमने लगा है मन भुलाके अपने सारे घम 
चाहे साथ हो कोई हमदम 
हमारी नैनों में है शर्म 
आपकी इंतज़ार में आँखें है नम 
इस प्रकृति के मंडप में एक हो जाए हम 
भुलाके सारी दुनिया इस रिश्ते की मिठास में ही खो जाए हम

Tuesday, September 18, 2012

जिंदा हूँ में..............


देखा इंसान की बदलती फिदरत, 

जिस से पाया था प्यार  उसी  से  पायी  नफरत,
इन  एहसासों में  अगर  कही  हूँ  में, 
तो जिंदा  हूँ  में...........

मेरी दुःख के तिन्के,
आँखों से तेरी छल्के, 
उन आंसुओं में मेरी याद है छुपी,
तो जिंदा हूँ में..............

मौत अगर आजाए तो कोई घम नहीं,
अपनों के दिल में अगर छुपी हूँ कही,
तो जिंदा हूँ में..................

Saturday, September 15, 2012


एम् .बी .ए 


ऊँचाई पाने की सफ़र में आया एम् .बी .ए .
अब लगता है क्यों आया ये पड़ाव ज़िन्दगी में

बनाने चले थे दुनियां में अपनी अलग पहचान
बन कर रह गए है अलग इंसान

ना जाने कहाँ गयी वो दिलों की मासूमीअत
देखने लगे है एक दुसरे में ज़रुरत

रिश्तों में ना है कोई ऐसी एहसास
जो छेड़े दिलों में अपनेपन का साज़

दिल से जोड़े थे हमने रिश्ते
पर इन रिश्तों में देखा अपने ही दिल को पिसते

गलत लगने लगा है हर फैसला
मनो ज़िन्दगी ले रही है बदला

दिल और दिमाग की लड़ाई
कर दिया है दिल की बिदाई

अब न रहा मौका न रही वो दस्तूर
बर्दाश करना पड़ेगा अपने इस फैसले का कसूर
रह गए है इस फैसले के साथ जीने के लिए मजबूर..........................

Tuesday, September 11, 2012


दोस्ती के नाम यह पैगाम .......


ज़िन्दगी की कश्ती में ,

बहते चले थे मस्ती में /

हर मोड़ पर थी एक नयी चाहत, 

जिसने लायी थी दिल में घबराहट/ 

नयी जगह और थी नयी मंजिल ,

दिल की ख़ुशी जो करनी थी हासिल/ 

मेरे इस सफ़र में आप न जाने कब जुड़ गए, 

दोस्ती के फूल ना जाने कब खिल गए /

इस फूल से है एक ही कामना ,

न तुम कभी मुरझाना /

अकेले जो निकल पड़े है इस राह पर, 

मिल जाए साथ दिलों की हमे अगर ,
जी लेंगे ज़िन्दगी युही हसकर /

Tuesday, August 21, 2012


:) :(

साथ  की थी हमने कितनी शरारतें,
अब दिल में है क्यों इतनी नफरतें /

राहों के काँटों को सहते ,
दिल्लगी हम निभाने चले थे, 
दिल की बात को सुनते ,
हकीकत को अनदेखा करते, 
हर दिन एक नयी मौत हम थे मरते/ 

दिल में कई सवाल ,
जो मचाये ज़िन्दगी में बवाल/ 

हर क्यों का जवाब नहीं होता ,
टूटे दिल को जोड़ना आसान नहीं होता /

अपने कब्र पर हमने चन्द आसूं बहा लिया, 
दिल को पत्थर बना कर अब हमने है जीना सीख लिया.................... 

Thursday, June 21, 2012



मेरा पहला प्यार 

तुम से  थी  ज़िन्दगी में  बहार, 
अब  सब  कुछ  लगता  है  बेकार, 
तुम  थे  मेरे  पहले  प्यार, 
ना  मिल  पाएंगे  हम  कभी....  
यह  सच  को  करना  चाहूं  इनकार/ 

है  यह  हम  दोनों  की  कहानी, 
में  हूँ  तेरे  दिल  की  वाणी, 
साथ  बितायी  हर  पल  सुहानी/ 

आसमान  बना  आइनाँ,
दिखाए  अपने  प्यार  की  निशानियाँ, 
हर  पत्ता  जाने  दिल  की  सिसकियाँ/ 

तेरी  परछाई  में  बीती  हर  रात, 
वो  तारे  भी  करते  अपनी  ही  बात/ 

तेरे  पत्तों  की  महक  और  फलों  की  मिठास, 
तुझे  बनाये  सबसे  ख़ास/ 

तू  ना  कभी  मेरे  बाँहों  में  समा  पाया, 
फिर  भी  इस  दिल  में  जगह  कर  गया/ 

मेरे  आँगन  का  था  तू  राजकुमार, 
बना  मेरा  पहला  प्यार/ 

प्रकृति  का  तू  एक  रंग, 
लाया  था  मेरी  ज़िन्दगी  में  तरंग, 
समा  गया  होकर  उन्ही  का  एक  अंग, 
ले  गया  मेरी  हर  राज़  अपने  संग/ 

अलग  थी  अपनी  कहानी, 
अभी  भी  हूँ  तुम्हारी  दीवानी/ 

थे  तो   तुम  एक  पेड़, 
नन्ही  कली के  दिल  को  तुमने  था  छेड़/

जगाया  मेरे  दिल  में  प्रेम  की  भावना, 
किया  था  मैंने  तेरे  संग  ज़िन्दगी  की  कामना/ 

बचपन  की  मासोमियत, 
बनाए हमारे  प्यार  को  खूबसूरत, 
भुला  देना  भी  थी  उस  उम्र  की  खासियत/ 

ना  कभी  थकता  ना  मेरी  बातों  पे  बिगड़ता, 
तेरे  बिना  यह  बचपन  से  जवानी  का  सफ़र  तो  तय  नहीं  होता/ 

अब  खलती  है  मुझे  तेरी  कमी, 
ना  मिला  कोई  जिसे  सुना  पाए  दिल  का  सभी/ 

हमे  ज़िन्दगी  के  सुख  देने  हुआ  तू  कुर्बान, 
अब  समझी  तेरा  प्यार  था  कीतना  महान, 
तुझसे बिछड़ हम  हुए बेजान/ 

तुझ  जैसा  साचा  साथी  ना  मिलेगा  मुझे, 
पर  काट  दिया  बेरहमी  से  तुझे/ 

ना  कुछ  माँगा  ना  बोला, 
क्यों  छोड़  गया  मुझे  यु  अकेला ???

Sunday, June 10, 2012



बरसात........ :)


सावन की पहली बरसात,
वाह..!!!!!!!!!!!!!  लाये नयी उमंग  अपने साथ/

गर्मी से थी बड़ी आफत,
अब मिलेगी थोड़ी राहत/

झूम उठा बाँवरा मन,
जैसे मोरनी हो उसकी दर्पण/

वो काले घने बादल,
लगे जैसे ममता की आँचल/

वो बादलों की खनक,
मिट्टी की महक,
बूंदों की वो छनक, 
ख़ुशी दे रही है दस्तक/

कहते है इसे प्यार का मौसम,
याद आता है गानों  का सरगम/

बरसात के बाद चांदनी,
बन जाए उस पल संगिनी/

दिलदार से करते दिल की बात,
और गरमा गरम पकोड़े हो साथ/

दिल झूम जाए ख़ुशी से, 
ना है कोई और उम्मीद इस पल से/

आ गया है सावन,
कुछ और ना चाहे ये पागल मन/


Friday, June 8, 2012

शब्द नहीं......


कहता है दिल मेरा बहुत कुछ ,
पर बयान करना चाहू तो शब्द नहीं/
घर के हर कोने में बसी है कई यादें ,
उन यादों को ऐतबार करने के लिए भी शब्द नहीं/
वोह चाँद तारों से बातें करते रात का गुज़र जाना,
अब अपने तनहाइयों से बात करने के लिए भी शब्द नहीं/
आँखों से आंसू चलके जैसे कोई जाम ,
उस आंसुओं को रोकने के भी शब्द नहीं /

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर शब्दों का यु साथ छोड़ देना,
क्या शब्द ही है जो कर पाए भावना इज़हार ,
दिल की बातें तोह आँखों से बयान होती है ,
शब्द ना हो तो क्यों रुक जाती है ज़िन्दगी?
शब्द न हो क्यों आ जाती है दूरियां?
क्यों हर एहसास को शब्दों में बयान करना पड़ता है?

ना समझा पाउंगी किसी को अपने दिल का हाल
क्यों की मेरे पास शब्द ही नहीं।................



Tuesday, May 29, 2012



आसमान की परी 


 आशियाना ढूँढती हुई
आ पहुंची हूँ किसी घरोंदे में
ज़िन्दगी की तलाश में भटकती
सन्नाटे की आह में सिसकती
दर्द की आवाज़ है गूंजती मेरी कानों में
उड़ने कि चाह लिए निकल पड़ी थी
पंख है फडफडाते, थक चुके हार चुके
पर ना मिला मेरा कोई आशियाना
आसमान में ही हूँ फिर भी मंजिल दूर है
उन्से क्या कहे जो मेरे साथ उड़ना चाहते है
फिर भी कहते है मुझे आसमान की परी........:)

Wednesday, May 23, 2012

प्यार
होता क्या है ये प्यार????
दो दिलों में टकरार, फिर इकरार, और फिर.........प्यार
शायद यही होता है प्यार......
मैंने ना जाना होता क्या है ये प्यार/
पर सुना तो बहुत कुछ है/
है ये भी एक सुनी सुनाई कहानी जो उतना ही मधुर था, जैसे फिल्मों में प्यार को दिखाया जाता है......साथ जीने मरने कि कसमें खाए थे, पर ना जाने कब बिछड़ गए/
है एक टूटे दिल के आन्सौं जो ना तो छुप  सकते ना ही बह सकते है,
तो आसुओं को तो इज़हार करना था अपने दिल हा हाल...........
कब आ गयी इतनी दूरियां,
ना सही जाए ये बेताबियाँ/
क्यों है मेरे दिल में अब भी तेरे लिए प्यार,
क्यों करती हूँ में अब भी तेरा इंतज़ार/
ना किया था कोई बेवफाई,
फिर क्यों दी मुझे ये तन्हाई/
हमारा प्यार किसी परीक्षा का मौताज नहीं,
कुर्बान हो प्यार तो ये ही सही/
ना कभी होगा ये प्यार कम.
तुम्हारा साथ खोया,...... बस इतना है घम/

फिर ना करेंगे कभी किसी से इतनी मोहोब्बत,
जो तुम ना कर पाए इसकी इबादत/
तुमसे बिछड़ कर यो जीना,
अच्छा  लगेगा मर जाना/
प्यार खोया ज़िन्दगी खोयी,
ना करेंगे प्यार कभी येही सीख है पायी/
दिल आखिर तू क्यों रोता है,
शायद प्यार का अंत युही होता है............

Sunday, April 15, 2012

मेरी कहानी.......

ना जाने क्यों ऐसा लगा जैसे मैंने इतने दिनों के जीवन में ना कुछ पाया है लेकिन बहुत कुछ ख़ोया हैं....... जब से मैंने ज़िन्दगी को समझा उस दिन से बस समझौता ही था मेरी ज़िन्दगी में ......कभी अपने आप को मैंने समझाया तो कभी किसी और ने.... पर ऐसा एक पल मुझे याद नहीं जहाँ में और बस में थी..... हमेशा किसी और ने मेरी ज़िन्दगी के फैसले लिए और उनकी ख़ुशी के खातिर मैंने मान भी लिया पर उन्होंने कभी ये नहीं सोचा की मेरी भी कुछ इत्छाएं है जिनके लिए में जी रही हूँ......


ये है मेरी कहानी,
बेजान दिल की जुबानी,
तन्हाई की निशानी/

दिल में सन्नाटा लिए,
ना जाने कहाँ हम चल दिए/

दुनिया से आंसू छुपाते,
ना मिला कोई जिसे अपना दर्द बता पाते/

जिसे सुनाया उसने मज़ाक बनाया,
तो इंसानियत का क्या मतलब रह गया/

ख़ुशी सब ने बांटा दर्द ना बाँट सका कोई,
अपना और पराया क्या समझा पायेंगे हमे कभी/

जिसे अपना माना उसने भी बेगाना बनाया,
उस से क्या शिकायत करना जब अन्जान हो गया है खुद का साया/

जब सब ने हमें ठुकराया,
तब आंसुओं ने साथ हर पल निभाया/

बस अकेले रह गए इस राह पर,
ना चाहेंगे किसी का साथ ज़िन्दगी भर/

तन्हाई बन गयी है मेरी साथी,
अब उसी से है हर खुसी मिल जाती/

बस ये है मेरी कहानी,
तन्हा है जिंदगानी..................

Saturday, April 14, 2012

मेरा राजकुमार.... :)


दिल का है ये पैगाम,
जो होगा किसी एक के नाम/


होगा कोई खुशनसीब,
जो होगा मेरे दिल के करीब/


समझे मुझे जैसे मेरा दर्पण,
कर दूँगी उसे अपना जीवन समर्पण/

ना होगा कुछ भी मेरा या तेरा,
होगा सब कुछ बस हमारा/



चाहू ऐसा इंसान जो करे मुझ से बेहत प्यार,
चाहे करना पड़े उसके लिए ज़िन्दगी भर इंतज़ार,
उस से मिलने को यह दिल बेकरार,
ना जाने कहाँ है वो मेरा राजकुमार.......


Friday, April 6, 2012


मीठा एहसास


है एक सुहानी शाम की बात,
हुई है बिन मौसम बरसात/


दिल में है सन्नाटा छाया,
पता नहीं घने बादल ने क्यों दिल को घबराया,
क्यों है ज़िन्दगी पर घम का साया/


वक़्त ने एहसास दिलाया,
तुने हर पल बुरा नहीं पाया,
मैंने ख़ुशी को संग है लाया/


एक अजीब सी खुशबू मेरी बाहों में भर गयी,
ना जाने क्या है जो दिल में ख़ुशी का एहसास छोड़ गयी/


मौसम ने जगाया दिल में प्यार,
काश हमारा भी होता ऐसा कोई दिलदार,
जिस से करना चाहे हम प्यार का इज़हार,
है ऐसे प्यार का इंतज़ार/


उस पल हर घम हमसे दूर था,
बस जीने का एहसास संग था,
और वो मेरी बाहों में था/


दिल कुछ और तो नहीं चाहता,
बस वक़्त उस पल थम जाता/


हर बारिश की बूँद हमे छेड़ता,
कर दिया था अपना जीवन उसे समर्पण,
तोह क्या हवा और क्या बारिश,
कोई ना हमे अलग कर पाता/


इस दुनिया में सच्चा प्यार था हमने पाया,
पर ऐसा लगा जैसे किसी ने है आवाज़ लगाया,
सच्चाई को था हमने जो ठुकराया/


ज़िन्दगी उस ही मोड़ पर वापस आ गयी,
जहाँ यह सपना वो छोड़ गयी/


अब हमे जीने का एहसास हो गया,
उस प्यार को तो बस सपने में ही है पाया/


सपना हुआ ख़तम मंजिल था आगे,
आ गए है फिर उसी दोराहे.........................

Sunday, April 1, 2012

देखा एक सपना


दिल ने चाहा मौत को गले लगाना,
पर भगवान् ने कहा जीवन है तुझे बिताना/

ना है कोई अपना ना कोई पराया,
क्या ऐसी ही दुनिया तुमने है बनाया/

क्या है दोस्ती और क्या प्यार,
जब हर कोई है सिर्फ अपने लिए बेकरार/

दिल ने पुछा जब ना कोई अपना ना कोई अंजाना,
तो कैसे है ज़िन्दगी को बिताना,
उसने कहा अब साया भी बन जाएगा बेगाना,
पैसे ने बना दिया सबको दीवाना/

ऐसी दुनिया तोह में जानता नहीं,
पर येही है वोह दुनिया तो सही/

मैंने चाहा बनाना बाघ जहां खिलेंगे फूल,
पर ना था पता दिल के रिश्तों पे ऐसे जम जाएगा धूल/

क्यों सुना रहे हो मुझे ये किस्सा,
कर दो मेरे सपने का पूरा हिस्सा/

में ज़िन्दगी देना जानू ना लेना,
खेल को है पूरा होना,
तो इंतज़ार है तुझे करना/

ना हुआ कोई सपना पूरा,
है ये जीवन अधूरा/

था ये भी एक सपना जो ना जाने कब पूरा होगा,
इंतज़ार इंतज़ार और बस इंतज़ार........यह भी ना हमसे अब होगा.....

जीवन के इस सफ़र मं अगर जीने  का हक नहीं तो मरने का भी नहीं,
खेल तो मैंने रचा है ख़तम तो यु होगा नहीं,
इंतज़ार हो ना हो बस वही है इस पल के लिए सही/

Sunday, January 15, 2012

शुभ संक्रान्ती..........


रंगों से सजी है  रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/


है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/


हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/


हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/


तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/


न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/ 


गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/


न है  पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान, 
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/ 


है ये हर शहर वासी की कहानी, 
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................


संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)