Tuesday, May 29, 2012



आसमान की परी 


 आशियाना ढूँढती हुई
आ पहुंची हूँ किसी घरोंदे में
ज़िन्दगी की तलाश में भटकती
सन्नाटे की आह में सिसकती
दर्द की आवाज़ है गूंजती मेरी कानों में
उड़ने कि चाह लिए निकल पड़ी थी
पंख है फडफडाते, थक चुके हार चुके
पर ना मिला मेरा कोई आशियाना
आसमान में ही हूँ फिर भी मंजिल दूर है
उन्से क्या कहे जो मेरे साथ उड़ना चाहते है
फिर भी कहते है मुझे आसमान की परी........:)

Wednesday, May 23, 2012

प्यार
होता क्या है ये प्यार????
दो दिलों में टकरार, फिर इकरार, और फिर.........प्यार
शायद यही होता है प्यार......
मैंने ना जाना होता क्या है ये प्यार/
पर सुना तो बहुत कुछ है/
है ये भी एक सुनी सुनाई कहानी जो उतना ही मधुर था, जैसे फिल्मों में प्यार को दिखाया जाता है......साथ जीने मरने कि कसमें खाए थे, पर ना जाने कब बिछड़ गए/
है एक टूटे दिल के आन्सौं जो ना तो छुप  सकते ना ही बह सकते है,
तो आसुओं को तो इज़हार करना था अपने दिल हा हाल...........
कब आ गयी इतनी दूरियां,
ना सही जाए ये बेताबियाँ/
क्यों है मेरे दिल में अब भी तेरे लिए प्यार,
क्यों करती हूँ में अब भी तेरा इंतज़ार/
ना किया था कोई बेवफाई,
फिर क्यों दी मुझे ये तन्हाई/
हमारा प्यार किसी परीक्षा का मौताज नहीं,
कुर्बान हो प्यार तो ये ही सही/
ना कभी होगा ये प्यार कम.
तुम्हारा साथ खोया,...... बस इतना है घम/

फिर ना करेंगे कभी किसी से इतनी मोहोब्बत,
जो तुम ना कर पाए इसकी इबादत/
तुमसे बिछड़ कर यो जीना,
अच्छा  लगेगा मर जाना/
प्यार खोया ज़िन्दगी खोयी,
ना करेंगे प्यार कभी येही सीख है पायी/
दिल आखिर तू क्यों रोता है,
शायद प्यार का अंत युही होता है............