Friday, February 22, 2013

उदासी 

बुलंद हो कर किया था हमने जो फैसला 
आज टूट रहा है वही होसला 

तरक्की की राह पर उठाये थे जो कदम 
चुकाना पड़ रहा है उसका भारी रकम 

कुछ हासिल करने की थी दिल में छोटी सी आस 
हर पड़ाव पर हो रहे है बस निराश 

कर रहे है हर दिन नया संघर्ष 
काश मिल जाए ज़िन्दगी में उत्कर्ष 

क्या किया था ज़िन्दगी में अपराध कोई घोर 
क्यों दे रहे हो सज़ा चलाके यु ज़िन्दगी का डोर 

न दिखे अब हमे जीने का कारण 
हर कदम पर असफलता से स्वीकार होगा हमे मरण 


Friday, February 8, 2013


ज़िन्दगी.................


लिख रहे है ज़िन्दगी का किताब 
हर दिन हो रहा है एक नया पन्ना बेनकाब 

रोज़ लिखते है अपने लिए अलग कहानी 
पर ज़िन्दगी लेती है अपनी अलग ही राह अनजानी 

ये तो तय कर लिया है क्या करना है हासिल 
पर ना जाने कहाँ मिलेगी हमे हमारी मंजिल 

है कुछ पाने की हम में कशिश 
कर रहे है हर वो कोशिश 

लेकिन हर कोशिश हो रही है नाकामियाब 
है कोई जो खोले हमारी कमजोरी का नकाब?

बनाना है अपने लिए अलग पहचान 
छोड जाना है दुनिया में अपना एक निशान 


Wednesday, February 6, 2013


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अच्छे दोस्त होने की शायद मिलती है सज़ा 
सहना पड़ता है दोस्त का गुस्सा 

दिल का है सार कसूर 
अपनों को ही कर देता है मजबूर 

वादा तो करते है निभाने अच्छे बुरे में साथ 
फिर भी बुरा लग जाता है दोस्त का बात 

मॉफी  लफ्ज़ लगने लगता है छोटा 
अपने गलती का घड़ा जो हो जाता है मोटा