शुभ संक्रान्ती..........
रंगों से सजी है रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/
है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/
हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/
हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/
तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/
न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/
गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/
न है पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान,
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/
है ये हर शहर वासी की कहानी,
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................
संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)
रंगों से सजी है रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/
है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/
हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/
हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/
तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/
न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/
गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/
न है पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान,
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/
है ये हर शहर वासी की कहानी,
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................
संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)
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