ख्वाइश .......
आया मन में एक अजीब ख्याल ,
था अपने आप से एक सवाल /
खयालो को मिल गया एक ज़रिया ,
कागज़ बन गया मेरा सहारा /
मनुष्य का रूप जो है लिया ,
दिल को है तनहा पाया ,
आसुओं को है अपनाया,
क्या येही है मानव रूप की माया?
अगर में कलम होती ,
कवी के हाथों में शोभा देती /
अगर कागज़ होती
बच्चे की हात में नाँव बनके ख़ुशी बटोरती
अगर फूल होती ,
चंद पल के जीवन में कई दिल लुभाती /
अगर कोई खिलौना होती ,
खेलने वाले की मासोमिअत में खो जाती /
अगर बरसात के रूप में बहती ,
कई दिलों की तन्हाई की साथी बनती/
अगर होती कोई परिंदा,
उड़ जाती कहके सबको अल्विदा/
लेकिन मानव रूप मैं क्या है मैंने पाया??
टूटे ख्वाबोँ को पूरा करने का है कोई ज़रिया ???
में तो चाहू कलि से भूल बनू ,
चन्द पलों की ज़िन्दगी में दिलों में प्यार भरूं /
कुछ और तो न चाहू ,
चंद पल जीयु और मुर्झाऊ ,
दिल की सुकून अपने साथ ले जाऊ /
ख्वाइशों से भरा ये बावरा मन,
ना अपनाना चाहे ये जीवन.........
आया मन में एक अजीब ख्याल ,
था अपने आप से एक सवाल /
खयालो को मिल गया एक ज़रिया ,
कागज़ बन गया मेरा सहारा /
मनुष्य का रूप जो है लिया ,
दिल को है तनहा पाया ,
आसुओं को है अपनाया,
क्या येही है मानव रूप की माया?
अगर में कलम होती ,
कवी के हाथों में शोभा देती /
अगर कागज़ होती
बच्चे की हात में नाँव बनके ख़ुशी बटोरती
अगर फूल होती ,
चंद पल के जीवन में कई दिल लुभाती /
अगर कोई खिलौना होती ,
खेलने वाले की मासोमिअत में खो जाती /
अगर बरसात के रूप में बहती ,
कई दिलों की तन्हाई की साथी बनती/
अगर होती कोई परिंदा,
उड़ जाती कहके सबको अल्विदा/
लेकिन मानव रूप मैं क्या है मैंने पाया??
टूटे ख्वाबोँ को पूरा करने का है कोई ज़रिया ???
में तो चाहू कलि से भूल बनू ,
चन्द पलों की ज़िन्दगी में दिलों में प्यार भरूं /
कुछ और तो न चाहू ,
चंद पल जीयु और मुर्झाऊ ,
दिल की सुकून अपने साथ ले जाऊ /
ख्वाइशों से भरा ये बावरा मन,
ना अपनाना चाहे ये जीवन.........
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