Sunday, March 23, 2014

आत्मा हत्या घोर पाप 

क्या आत्मा हत्या ही है हर मुक़श्किल का समाधान 
ऐसा होता तो क्या जीवित रहता कोई इंसान 

माना घम्  में खो जाती है सोचने कि क्षमता 
आजाती है ज़िन्दगी में उदासीनता 
ज़िन्दगी को बटोर कर क्या नहीं दिखा सकते थोड़ी सहनशीलता ???

माना ज़िन्दगी के एक मोड़ पर हुए है असफल 
पर क्या ज़िन्दगी हमेशा होगी युही निष्फल??

उस एक पल कि कमज़ोरी 
क्या कर देगी हमारी ज़िन्दगी अधूरी??

माना सपने टूटने का दर्द सहना है मुश्किल 
पर क्या एक ही सपना है ज़िन्दगी कि मंज़िल?
क्यों न करे दुसरे सपनों को हासिल??

जी जा तू वो एक कमज़ोर पल 
ज़िन्दगी हो जायेगी सफल 
बिखर गया तू अगर उस पल 
जीवन ही हो जायेगा ओझल 

मुस्कुराकर जीने का नाम ही है ज़िन्दगी 
हक़ीक़त हो जाएगी तुम्हारी बंदगी 

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