Monday, April 18, 2016

गु-गुम है मुस्कराहट के पीछे जिनकी बातें
रु-  रूह से चुने है जिसने अपनी आदतें
स्-स्वप्न के ख्यालों में सजाये है शरारतें
ने- नेमी से कुछ अलग करने की है जिसके हसरतें
हा- हालात के परे सोचने की रखती है इरादे

लिखने चले है जो नयी ज़िंदगानी
गुरु स्नेहा की बनेगी अलग एक कहानी

थोड़ी नोक झोक थोड़ी मस्ती
ऐसे ही सजे हमारी कश्ती

प्यार हो इस रिश्तें का सार
दोस्ती से शुरू हो इसका करार
नए सफर का मिल कर करे ऐतबार

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