सावन
मयूर का नाच जैसे कत्थक
पंची ढूंढे घरोंदे का पथ
लगे हमे कुछ तीखा खाने का लथ
बूंदों का शोर जैसे संगीत
भुला दे सार अतीत
खिले फूल जो खींचे हमे अपनी ऒर
पत्ते भी झूमे जैसे कोई मोर
आसमान में खनके बिलजी की तार
इसी सुन्दरता ने दिया हमारे ज़िन्दगी को सवार
धुल गयी मन की साड़ी कडवाहट
अस सुन सके है अपने दिल की सच्ची आहट
बरसात में धुल गए हमारे सारे घम
ख़ुशी का एहसास अब हुए है मद्धम
मयूर का नाच जैसे कत्थक
पंची ढूंढे घरोंदे का पथ
लगे हमे कुछ तीखा खाने का लथ
बूंदों का शोर जैसे संगीत
भुला दे सार अतीत
खिले फूल जो खींचे हमे अपनी ऒर
पत्ते भी झूमे जैसे कोई मोर
आसमान में खनके बिलजी की तार
इसी सुन्दरता ने दिया हमारे ज़िन्दगी को सवार
धुल गयी मन की साड़ी कडवाहट
अस सुन सके है अपने दिल की सच्ची आहट
बरसात में धुल गए हमारे सारे घम
ख़ुशी का एहसास अब हुए है मद्धम