Friday, April 6, 2012


मीठा एहसास


है एक सुहानी शाम की बात,
हुई है बिन मौसम बरसात/


दिल में है सन्नाटा छाया,
पता नहीं घने बादल ने क्यों दिल को घबराया,
क्यों है ज़िन्दगी पर घम का साया/


वक़्त ने एहसास दिलाया,
तुने हर पल बुरा नहीं पाया,
मैंने ख़ुशी को संग है लाया/


एक अजीब सी खुशबू मेरी बाहों में भर गयी,
ना जाने क्या है जो दिल में ख़ुशी का एहसास छोड़ गयी/


मौसम ने जगाया दिल में प्यार,
काश हमारा भी होता ऐसा कोई दिलदार,
जिस से करना चाहे हम प्यार का इज़हार,
है ऐसे प्यार का इंतज़ार/


उस पल हर घम हमसे दूर था,
बस जीने का एहसास संग था,
और वो मेरी बाहों में था/


दिल कुछ और तो नहीं चाहता,
बस वक़्त उस पल थम जाता/


हर बारिश की बूँद हमे छेड़ता,
कर दिया था अपना जीवन उसे समर्पण,
तोह क्या हवा और क्या बारिश,
कोई ना हमे अलग कर पाता/


इस दुनिया में सच्चा प्यार था हमने पाया,
पर ऐसा लगा जैसे किसी ने है आवाज़ लगाया,
सच्चाई को था हमने जो ठुकराया/


ज़िन्दगी उस ही मोड़ पर वापस आ गयी,
जहाँ यह सपना वो छोड़ गयी/


अब हमे जीने का एहसास हो गया,
उस प्यार को तो बस सपने में ही है पाया/


सपना हुआ ख़तम मंजिल था आगे,
आ गए है फिर उसी दोराहे.........................

2 comments:

Unknown said...

poems r very soothing,feeling like heard a chool melody song.due to language i understood them partially but i was connected to them.
"you may wrote them for ur thrill but they r very chill touching soul
some poems kills
your poems heal the ills"

Sneha Naik said...

thanks a lot pranay :) this is the best compliment i ever got..means a lot to me :)