Sunday, April 15, 2012

मेरी कहानी.......

ना जाने क्यों ऐसा लगा जैसे मैंने इतने दिनों के जीवन में ना कुछ पाया है लेकिन बहुत कुछ ख़ोया हैं....... जब से मैंने ज़िन्दगी को समझा उस दिन से बस समझौता ही था मेरी ज़िन्दगी में ......कभी अपने आप को मैंने समझाया तो कभी किसी और ने.... पर ऐसा एक पल मुझे याद नहीं जहाँ में और बस में थी..... हमेशा किसी और ने मेरी ज़िन्दगी के फैसले लिए और उनकी ख़ुशी के खातिर मैंने मान भी लिया पर उन्होंने कभी ये नहीं सोचा की मेरी भी कुछ इत्छाएं है जिनके लिए में जी रही हूँ......


ये है मेरी कहानी,
बेजान दिल की जुबानी,
तन्हाई की निशानी/

दिल में सन्नाटा लिए,
ना जाने कहाँ हम चल दिए/

दुनिया से आंसू छुपाते,
ना मिला कोई जिसे अपना दर्द बता पाते/

जिसे सुनाया उसने मज़ाक बनाया,
तो इंसानियत का क्या मतलब रह गया/

ख़ुशी सब ने बांटा दर्द ना बाँट सका कोई,
अपना और पराया क्या समझा पायेंगे हमे कभी/

जिसे अपना माना उसने भी बेगाना बनाया,
उस से क्या शिकायत करना जब अन्जान हो गया है खुद का साया/

जब सब ने हमें ठुकराया,
तब आंसुओं ने साथ हर पल निभाया/

बस अकेले रह गए इस राह पर,
ना चाहेंगे किसी का साथ ज़िन्दगी भर/

तन्हाई बन गयी है मेरी साथी,
अब उसी से है हर खुसी मिल जाती/

बस ये है मेरी कहानी,
तन्हा है जिंदगानी..................

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