Tuesday, August 21, 2012


:) :(

साथ  की थी हमने कितनी शरारतें,
अब दिल में है क्यों इतनी नफरतें /

राहों के काँटों को सहते ,
दिल्लगी हम निभाने चले थे, 
दिल की बात को सुनते ,
हकीकत को अनदेखा करते, 
हर दिन एक नयी मौत हम थे मरते/ 

दिल में कई सवाल ,
जो मचाये ज़िन्दगी में बवाल/ 

हर क्यों का जवाब नहीं होता ,
टूटे दिल को जोड़ना आसान नहीं होता /

अपने कब्र पर हमने चन्द आसूं बहा लिया, 
दिल को पत्थर बना कर अब हमने है जीना सीख लिया.................... 

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