दोस्ती के नाम यह पैगाम .......
ज़िन्दगी की कश्ती में ,
बहते चले थे मस्ती में /
हर मोड़ पर थी एक नयी चाहत,
जिसने लायी थी दिल में घबराहट/
नयी जगह और थी नयी मंजिल ,
दिल की ख़ुशी जो करनी थी हासिल/
मेरे इस सफ़र में आप न जाने कब जुड़ गए,
दोस्ती के फूल ना जाने कब खिल गए /
इस फूल से है एक ही कामना ,
न तुम कभी मुरझाना /
अकेले जो निकल पड़े है इस राह पर,
मिल जाए साथ दिलों की हमे अगर ,
जी लेंगे ज़िन्दगी युही हसकर /
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