Friday, January 25, 2013

साल 2012

वाह क्या गुज़रा ये साल 
दिल में एहसासों का कायम कर गया मिसाल 

इंसान की जो बदली नियत 
चुकाया अपने आंसुओं से उसकी कीमत 

कुछ ऐसों से आशा की थी जो हमने वफ़ा 
आंसू भी हो गए हमसे खफा 

बुने थे दिल से कई रिश्ते 
अब खुश है देख के उनके किश्ते 

दिल को रोज़ यु पिस्ता देख
आये थे दिल में बुरे ख़याल कई अनेक 

उदासी बन गयी थी हमारी पहचान 
हर ज़ख्म का है दिल पर गहरा निशाँ 

जब इंसान की फिदरत ही यु बदल सकती है 
तो क्या वक़्त को बदल ने देर लगती है?

जब जब घम का बादल छाया 
उन्हें सहने की क्षमता भी हमने पाया 

अपने से प्यार करना जब सीखा 
हर दर्द तब से लगने लगा फीखा 

अब समझते है इंसान को परखना 
अपने से ज्यादा न है किसी को रखना 

2012 सिखा गया हमे हिम्मत 
सहने की अब है मुझमे ताकत 
दिखा दूंगी अगर अपनी असलियत 
चुकाना पड़ेगा तुम्हे भारी कीमत 

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