Wednesday, January 2, 2013

jan 1st 2013 ................

जब साल की शुरुवाद ही हो इतनी ख़राब 
साल का ठीक गुज़ारना मनो कोई ख्वाब 

ना थी किसी की भी मर्ज़ी इसमें शामिल 
हमारा नसीब ही न था कुछ अत्चे के काबिल 

2012 ने भी सिखाये यही बातें 
मेहनत हमेशा रंग नहीं लाते 

आज आप करो हमसे ये करार 
ख़ुशी के हम भी है हक़दार 
दुःख के क्यों है हमेशा हम ही शिकार??

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