jan 1st 2013 ................
जब साल की शुरुवाद ही हो इतनी ख़राब
साल का ठीक गुज़ारना मनो कोई ख्वाब
ना थी किसी की भी मर्ज़ी इसमें शामिल
हमारा नसीब ही न था कुछ अत्चे के काबिल
2012 ने भी सिखाये यही बातें
मेहनत हमेशा रंग नहीं लाते
आज आप करो हमसे ये करार
ख़ुशी के हम भी है हक़दार
दुःख के क्यों है हमेशा हम ही शिकार??
जब साल की शुरुवाद ही हो इतनी ख़राब
साल का ठीक गुज़ारना मनो कोई ख्वाब
ना थी किसी की भी मर्ज़ी इसमें शामिल
हमारा नसीब ही न था कुछ अत्चे के काबिल
2012 ने भी सिखाये यही बातें
मेहनत हमेशा रंग नहीं लाते
आज आप करो हमसे ये करार
ख़ुशी के हम भी है हक़दार
दुःख के क्यों है हमेशा हम ही शिकार??
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