Tuesday, March 12, 2013

टेक्नोलॉजी की दुनिया 

जनम से मरण तक का सफ़र 
कंप्यूटर की दुनिया में आता है नज़र 
कभी सोचा क्या होगा इसका असर??

सिर्फ जानती हूँ क्या  है माँ की कोक 
बाहर मना रहे है लड़की होने का शोक 
टेक्नोलॉजी ना कर पाया इस कुरीति को रोक 

ना तय किया उसके लिए कोई नाम 
पर ये तय कर लिया हासिल करना है उसे कौनसा मुकाम 

खेल खुद से है वो अनजान 
कंप्यूटर की खेल में लगा देते है अपनी जान 

दोस्तों से नहीं होती आमने सामने बात 
बस आभासी दुनिया में ही है सबका साथ 

न रही बचपन न योवन की सुन्दरता 
टेक्नोलॉजी नहीं जानता है कोई भी पहलु की महानता 

गुज़र जाती है युही ज़िन्दगी का सफ़र 
ना रहती है कोई यादों की लहर 

शादी है दो दिलों का अटूट रिश्ता 
वो भी है टेक्नोलॉजी की दुनिया में पिस्ता 

हद हो जाती है जब अपनों का साथ छूटने का ग़म 
टेक्नोलॉजी से ही जताते है शोक अपने ही हुम्दुम 

 समझ नहीं आता हम मशीन है या इन्सां 
टेक्नोलॉजी की दुनिया ही क्यों है अपनी पहचान 
कहाँ खो रहे है अपनेपन के निशाँ???

माना टेक्नोलॉजी है आज की दुनिया की ज़रुरत 
पर क्या वही है इस ज़िन्दगी की वजूद और शाशक???


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