देखा एक सपना
दिल ने चाहा मौत को गले लगाना,
पर भगवान् ने कहा जीवन है तुझे बिताना/
ना है कोई अपना ना कोई पराया,
क्या ऐसी ही दुनिया तुमने है बनाया/
क्या है दोस्ती और क्या प्यार,
जब हर कोई है सिर्फ अपने लिए बेकरार/
दिल ने पुछा जब ना कोई अपना ना कोई अंजाना,
तो कैसे है ज़िन्दगी को बिताना,
उसने कहा अब साया भी बन जाएगा बेगाना,
पैसे ने बना दिया सबको दीवाना/
ऐसी दुनिया तोह में जानता नहीं,
पर येही है वोह दुनिया तो सही/
मैंने चाहा बनाना बाघ जहां खिलेंगे फूल,
पर ना था पता दिल के रिश्तों पे ऐसे जम जाएगा धूल/
क्यों सुना रहे हो मुझे ये किस्सा,
कर दो मेरे सपने का पूरा हिस्सा/
में ज़िन्दगी देना जानू ना लेना,
खेल को है पूरा होना,
तो इंतज़ार है तुझे करना/
ना हुआ कोई सपना पूरा,
है ये जीवन अधूरा/
था ये भी एक सपना जो ना जाने कब पूरा होगा,
इंतज़ार इंतज़ार और बस इंतज़ार........यह भी ना हमसे अब होगा.....
जीवन के इस सफ़र मं अगर जीने का हक नहीं तो मरने का भी नहीं,
खेल तो मैंने रचा है ख़तम तो यु होगा नहीं,
इंतज़ार हो ना हो बस वही है इस पल के लिए सही/