Monday, October 31, 2011

नयी सफ़र 

एक नयी सुबह और एक नया सफ़र,
मंजिल पर टिकी है नज़र/

अन्जानी राहों ने खोले है बाहें,
कितनी भी मुश्किलें आये बढ़ना है अब हमें/

इस राह पर जाने क्या होगा हासिल,
फैसला कर पाना है मुश्किल/

बीता छोड़ आगे बढ़ना ज़िन्दगी का दस्तूर,
अब ये भी है हमे मंज़ूर/

निकल पड़े है नयी सफ़र पर, अन्जान से पहचान और मुश्किल का सामना करने,
ऐ खुदा बस इतना करदे दे जाना होंसला, जो निकले है अन्जान राह पर चलने/

No comments: