Saturday, April 14, 2012

मेरा राजकुमार.... :)


दिल का है ये पैगाम,
जो होगा किसी एक के नाम/


होगा कोई खुशनसीब,
जो होगा मेरे दिल के करीब/


समझे मुझे जैसे मेरा दर्पण,
कर दूँगी उसे अपना जीवन समर्पण/

ना होगा कुछ भी मेरा या तेरा,
होगा सब कुछ बस हमारा/



चाहू ऐसा इंसान जो करे मुझ से बेहत प्यार,
चाहे करना पड़े उसके लिए ज़िन्दगी भर इंतज़ार,
उस से मिलने को यह दिल बेकरार,
ना जाने कहाँ है वो मेरा राजकुमार.......


Friday, April 6, 2012


मीठा एहसास


है एक सुहानी शाम की बात,
हुई है बिन मौसम बरसात/


दिल में है सन्नाटा छाया,
पता नहीं घने बादल ने क्यों दिल को घबराया,
क्यों है ज़िन्दगी पर घम का साया/


वक़्त ने एहसास दिलाया,
तुने हर पल बुरा नहीं पाया,
मैंने ख़ुशी को संग है लाया/


एक अजीब सी खुशबू मेरी बाहों में भर गयी,
ना जाने क्या है जो दिल में ख़ुशी का एहसास छोड़ गयी/


मौसम ने जगाया दिल में प्यार,
काश हमारा भी होता ऐसा कोई दिलदार,
जिस से करना चाहे हम प्यार का इज़हार,
है ऐसे प्यार का इंतज़ार/


उस पल हर घम हमसे दूर था,
बस जीने का एहसास संग था,
और वो मेरी बाहों में था/


दिल कुछ और तो नहीं चाहता,
बस वक़्त उस पल थम जाता/


हर बारिश की बूँद हमे छेड़ता,
कर दिया था अपना जीवन उसे समर्पण,
तोह क्या हवा और क्या बारिश,
कोई ना हमे अलग कर पाता/


इस दुनिया में सच्चा प्यार था हमने पाया,
पर ऐसा लगा जैसे किसी ने है आवाज़ लगाया,
सच्चाई को था हमने जो ठुकराया/


ज़िन्दगी उस ही मोड़ पर वापस आ गयी,
जहाँ यह सपना वो छोड़ गयी/


अब हमे जीने का एहसास हो गया,
उस प्यार को तो बस सपने में ही है पाया/


सपना हुआ ख़तम मंजिल था आगे,
आ गए है फिर उसी दोराहे.........................

Sunday, April 1, 2012

देखा एक सपना


दिल ने चाहा मौत को गले लगाना,
पर भगवान् ने कहा जीवन है तुझे बिताना/

ना है कोई अपना ना कोई पराया,
क्या ऐसी ही दुनिया तुमने है बनाया/

क्या है दोस्ती और क्या प्यार,
जब हर कोई है सिर्फ अपने लिए बेकरार/

दिल ने पुछा जब ना कोई अपना ना कोई अंजाना,
तो कैसे है ज़िन्दगी को बिताना,
उसने कहा अब साया भी बन जाएगा बेगाना,
पैसे ने बना दिया सबको दीवाना/

ऐसी दुनिया तोह में जानता नहीं,
पर येही है वोह दुनिया तो सही/

मैंने चाहा बनाना बाघ जहां खिलेंगे फूल,
पर ना था पता दिल के रिश्तों पे ऐसे जम जाएगा धूल/

क्यों सुना रहे हो मुझे ये किस्सा,
कर दो मेरे सपने का पूरा हिस्सा/

में ज़िन्दगी देना जानू ना लेना,
खेल को है पूरा होना,
तो इंतज़ार है तुझे करना/

ना हुआ कोई सपना पूरा,
है ये जीवन अधूरा/

था ये भी एक सपना जो ना जाने कब पूरा होगा,
इंतज़ार इंतज़ार और बस इंतज़ार........यह भी ना हमसे अब होगा.....

जीवन के इस सफ़र मं अगर जीने  का हक नहीं तो मरने का भी नहीं,
खेल तो मैंने रचा है ख़तम तो यु होगा नहीं,
इंतज़ार हो ना हो बस वही है इस पल के लिए सही/

Sunday, January 15, 2012

शुभ संक्रान्ती..........


रंगों से सजी है  रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/


है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/


हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/


हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/


तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/


न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/ 


गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/


न है  पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान, 
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/ 


है ये हर शहर वासी की कहानी, 
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................


संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)

Saturday, December 31, 2011

नया साल 


गुज़र गया जो कल,
याद आता है हर वोह पल/


याद है हर वो शाम, 
जो किया था दोस्तों के नाम/


ज़िन्दगी ने दिए कुछ नए मंजिल,
जिन राहों पर हुए कुछ खुशीआं हासिल/


जितने पल बिताये बच्चों को पढ़ाते ,
उतने ही पल बीताये खुद बच्चे बनते/


वो लड़ना झगड़ना वो छेड़ छाड़,
बन गया है सुहाना याद/


बिताये सभी पल अच्छे बुरे,
ज़िन्दगी ने थामा जब भी हम गिरे/ 


गुज़रा जो साल वो था दो हज़ार ग्यारा, 
दे गया वो ज़िन्दगी को किनारा /


२०११ बना ज़िन्दगी का ख़ास हिस्सा,
काश २०१२ का भी हो येही किस्सा /


आया है नया साल संग लेकर अपने ही कुछ पल,
पर भुला ना पाएंगे गुज़रा जो कल/   :) 


नए साल की हर्थिक सुभ कामनाये :)

Monday, December 5, 2011

दोस्त- दोस्ती 


दिल ने आवाज़ दी,ये अपने लगते  है /
मैंने पुछा क्या हम दोस्त बन सकते है?


दोस्ती हुई झगडे भी होते रहे/
दोस्ती के रंग गहरे होते गए/


पर तब किसी ने मुझसे पूछा,
क्यों लगता है ये दोस्त सच्चा?
ना था कोई जवाब जो लगता मुझे अच्छा/


दिल हुआ उदास, डरता है करते आभास/
ना जाने क्यों दोस्त होते है इतने ख़ास/
क्या वो कभी समझेंगे दिल की आवाज़?


thanks to someone who asked me this question for i was angry on someone and some one else questioned our friendship but must thank that person who asked this question may be for the inspiration if at all this is good :P



Sunday, November 20, 2011

दिल की आवाज़


मेरा दिल है मुझसे कहता/


क्यों तू हर पल दुखी रहता/


क्यों तू हर पल कुछ सोचता/


क्यों तू ज़िन्दगी से संघर्ष करता/


क्यों बीती बात है याद आता/


क्यों अकेले में आसों बहाता/


क्यों है तुझे हर बात की चिंता/


क्यों में कुछ कर नहीं पाता/


है तो यह दिल की आवाज़
दिल ही जाने या जाने खुदा/