Wednesday, January 16, 2013


दिल-- दोस्ती--प्यार 

क्या प्यार ही सब कुछ होता है? क्या दोस्ती का कोई मतलब नहीं होता? कुछ ऐसी ही है यह कहानी, दो दोस्तों की गहरी दोस्ती,  उनके बिछडने और फिर मिलने की कहानी............उस लड़की के दिल में है अभी भी डर, इतिहास की तो भुला दिया पर दिल के दर्द को क्या मिटा पायेगी?? बयान करती है अपने कई विचार, कुछ ऐसा था उनके दोस्ती का सफ़र.......................

कब आगये हम इतने पास 
एक दुसरे को लगने लगे ख़ास 

लोग करवाना चाहते थे हमसे प्यार का इज़हार 
क्या कहते जब न था दिल में तुम्हारे लिए प्रेमी का प्यार 

ना जाने कब पद गयी अपनी दोस्ती में दरारें 
कब बन गयी दिलों में दीवारें 

बदल गए थे हालात 
न समझ पाए एक दुसरे के दिल की बात 

जा समझते थे एक दुसरे की ख़ामोशी 
अब अलग रहने में ही थी तुम्हारी ख़ुशी 

न थी इस दोस्ती से कोई भी आस 
अब भी कहूँगी तुम्हारी दोस्ती थी बहुत ख़ास 

मिली थी दिल को दर्द की सज़ा 
उस दिल को फिर भी था इस दोस्ती पर भरोसा 

ना कभी दोहराना चाहेंगे ये इतिहास 
दिल को भी है प्यार और दर्द का एहसास 

ये तो था बीता हुआ कल 
सुहाना होगा आने वाला हर पल 
न सहेंगे इस दोस्ती में किसी का छल 

जुड़ गयी है फिर से दोस्ती 
लाना है इस रिश्तें में फिर से वही मस्ती 

इस रिश्तें में क्या अब भी है वही गहराई??
दिल कहता है दूंगा इस बात की में गवाही 

न चाहते है कुछ भी ज्यादा 
एक अत्चा दोस्त बनके इस रिश्तें को निभाने का बस एक वादा 

न है तुमपे कोई जोर 
क्यों की रजामंदी होनी चाहिए दोनों ऒर 

Saturday, January 12, 2013

काश मेरा भी भाई होता 

आँखें कर रही है तेरा इंतज़ार 
तेरी आवाज़ सुनने को दिल बेकरार 

दिल की बात ज़ुबान तक आती नहीं 
इंतज़ार की घडी कटती नहीं 

कैसे इज़हार करे हमारे दिल का प्यार 
कब मिलोगे करने इसका इकरार 

दिल में छुपाया प्यार करेगे राखी से बयान 
आ जाओ भैया हो जाये है हम बेजान 



Wednesday, January 2, 2013

jan 1st 2013 ................

जब साल की शुरुवाद ही हो इतनी ख़राब 
साल का ठीक गुज़ारना मनो कोई ख्वाब 

ना थी किसी की भी मर्ज़ी इसमें शामिल 
हमारा नसीब ही न था कुछ अत्चे के काबिल 

2012 ने भी सिखाये यही बातें 
मेहनत हमेशा रंग नहीं लाते 

आज आप करो हमसे ये करार 
ख़ुशी के हम भी है हक़दार 
दुःख के क्यों है हमेशा हम ही शिकार??

Sunday, December 2, 2012


यादों का सफ़र ............ :) 


ले चलती हूँ वक़्त के उस पार 
जहाँ थी ज़िन्दगी में खुशियों की खुमार 
हर लम्हा था सुनेहरा उपहार 
देखी भावनाओं की बहार 
दिखे सबके चेहरे हज़ार 

सफ़र में पहला था आगरा 
ताजमहल की सुन्दरता ने किया दिल को बावरा 
प्यार था हवा में गहरा 

पहुंचे हम मथुरा 
कान्हा का खेल बड़ा ही न्यारा 
मलाई और लस्सी की बेहती धारा 

फिर चल पड़े राजधानी की ओर 
त्याग के चिंगारी की जोर 
पार्लियामेंट की शोर 
शांति के है वहां कई चोर 


अगला  पड़ाव था  शिमला 
ठण्ड ने लगाया स्वागत का पहरा 
सबने बाँधा कफ्तान का सेहरा 

कुफरी में की गुड सवारी 
हिमालय की शिखर दिखी प्यारी 

पहुंचे जब हम मनाली 
बन गए बर्फ की प्याली 
बीता भुलाकर सबके दिलों में अपनेपन की भावनाएं खिली 

अम्रित्सर की चमक 
पंजाबी भाई चारे की  महक 

वागाह बॉर्डर पर हिन्दुस्तानी की दहाड़ 
बन गयी दिल में गर्व की पहाड़ 

मिला कई सुन्दर दृश्यों को देखने का मौका 
अपनों का साथ सबसे अनोखा 

गुरुओं की साथ सबसे निराली 
जगाई दिल में ख़ुशी की कव्वाली 

आपका गुस्सा और प्यार 
थी आपके अपनेपन की बहार 
आप ना होते तोह न होता हमारा सफ़र यादगार 
करते रेह्जायेंगे ऐसे सफ़र का जीवन भर इंतज़ार 

सफ़र हुआ ख़तम
सबकी आँखें है नम 
यादोँ की बहार दिल में लिए हम 
जी जायेंगे युही हम....................



Tuesday, November 13, 2012

WAQT NAHI 

suraj ki pehli kiran
jagaye dil mein umang
lekin sukriya ada karne ka
WAQT NAHI

har woh chandni raat
jaane humare dil ki har baat
lekin apne hi dil ka haal sunne ka 

WAQT NAHI

banaye hai kai rishtey
choot gaye banke kai kishtey
un kishton ko jodne ka
WAQT NAHI

risthon se naata choota
doston se pyaar toota
in toote dilon ko milane ka
WAQT NAHI

amaavasya ki raat
diyon ki roshni hoti hai saath
likin dil ke andhere ko door karne ka
WAQT NAHI

na koi rishta na koi dosti
na rahi dilon mein woh masti
ab kisi se kya kahe
jab apne hi zindagi mein apne liye
WAQT NAHI

Thursday, November 1, 2012

ख्वाइश .......

आया मन में एक अजीब ख्याल ,
था अपने आप से एक सवाल /

खयालो को मिल गया एक ज़रिया ,
कागज़ बन गया मेरा सहारा /


मनुष्य का रूप जो है लिया ,

दिल को है तनहा पाया ,
आसुओं को है अपनाया, 
क्या येही है मानव रूप की माया?

अगर में कलम होती ,
कवी के हाथों में शोभा देती /

अगर कागज़ होती 
बच्चे की हात में नाँव बनके ख़ुशी बटोरती 

अगर फूल होती ,
चंद पल के जीवन में कई दिल लुभाती /

अगर कोई खिलौना होती ,
खेलने वाले की मासोमिअत में खो जाती /

अगर बरसात के रूप में बहती ,
कई दिलों की तन्हाई की साथी बनती/ 

अगर होती कोई परिंदा,
उड़ जाती कहके सबको अल्विदा/ 

लेकिन मानव रूप मैं क्या है मैंने पाया??
टूटे ख्वाबोँ को पूरा करने का है कोई ज़रिया ???

में तो चाहू कलि से भूल बनू ,
चन्द पलों की ज़िन्दगी में दिलों में प्यार भरूं /

कुछ और तो न चाहू ,
चंद  पल जीयु और मुर्झाऊ ,
दिल की सुकून अपने साथ ले जाऊ /

ख्वाइशों से भरा ये बावरा मन,
ना अपनाना चाहे ये जीवन.........

Monday, October 8, 2012



इंतज़ार ...........


सुहाना है मौसम 
बारिश के बूंदों की ये सरगम 
हवा भी चले है मद्धम 
अनोखा लगे ये संगम 
झूमने लगा है मन भुलाके अपने सारे घम 
चाहे साथ हो कोई हमदम 
हमारी नैनों में है शर्म 
आपकी इंतज़ार में आँखें है नम 
इस प्रकृति के मंडप में एक हो जाए हम 
भुलाके सारी दुनिया इस रिश्ते की मिठास में ही खो जाए हम