दिल-- दोस्ती--प्यार
क्या प्यार ही सब कुछ होता है? क्या दोस्ती का कोई मतलब नहीं होता? कुछ ऐसी ही है यह कहानी, दो दोस्तों की गहरी दोस्ती, उनके बिछडने और फिर मिलने की कहानी............उस लड़की के दिल में है अभी भी डर, इतिहास की तो भुला दिया पर दिल के दर्द को क्या मिटा पायेगी?? बयान करती है अपने कई विचार, कुछ ऐसा था उनके दोस्ती का सफ़र.......................
कब आगये हम इतने पास
एक दुसरे को लगने लगे ख़ास
लोग करवाना चाहते थे हमसे प्यार का इज़हार
क्या कहते जब न था दिल में तुम्हारे लिए प्रेमी का प्यार
ना जाने कब पद गयी अपनी दोस्ती में दरारें
कब बन गयी दिलों में दीवारें
बदल गए थे हालात
न समझ पाए एक दुसरे के दिल की बात
जा समझते थे एक दुसरे की ख़ामोशी
अब अलग रहने में ही थी तुम्हारी ख़ुशी
न थी इस दोस्ती से कोई भी आस
अब भी कहूँगी तुम्हारी दोस्ती थी बहुत ख़ास
मिली थी दिल को दर्द की सज़ा
उस दिल को फिर भी था इस दोस्ती पर भरोसा
ना कभी दोहराना चाहेंगे ये इतिहास
दिल को भी है प्यार और दर्द का एहसास
ये तो था बीता हुआ कल
सुहाना होगा आने वाला हर पल
न सहेंगे इस दोस्ती में किसी का छल
जुड़ गयी है फिर से दोस्ती
लाना है इस रिश्तें में फिर से वही मस्ती
इस रिश्तें में क्या अब भी है वही गहराई??
दिल कहता है दूंगा इस बात की में गवाही
न चाहते है कुछ भी ज्यादा
एक अत्चा दोस्त बनके इस रिश्तें को निभाने का बस एक वादा
न है तुमपे कोई जोर
क्यों की रजामंदी होनी चाहिए दोनों ऒर

