यादों का सफ़र ............ :)
ले चलती हूँ वक़्त के उस पार
जहाँ थी ज़िन्दगी में खुशियों की खुमार
हर लम्हा था सुनेहरा उपहार देखी भावनाओं की बहार
दिखे सबके चेहरे हज़ार
सफ़र में पहला था आगरा
ताजमहल की सुन्दरता ने किया दिल को बावरा
प्यार था हवा में गहरा
पहुंचे हम मथुरा
कान्हा का खेल बड़ा ही न्यारा
मलाई और लस्सी की बेहती धारा
फिर चल पड़े राजधानी की ओर
त्याग के चिंगारी की जोर
पार्लियामेंट की शोर
शांति के है वहां कई चोर
अगला पड़ाव था शिमला
ठण्ड ने लगाया स्वागत का पहरा
सबने बाँधा कफ्तान का सेहरा
कुफरी में की गुड सवारी
हिमालय की शिखर दिखी प्यारी
पहुंचे जब हम मनाली
बन गए बर्फ की प्याली
बीता भुलाकर सबके दिलों में अपनेपन की भावनाएं खिली
अम्रित्सर की चमक
पंजाबी भाई चारे की महक
वागाह बॉर्डर पर हिन्दुस्तानी की दहाड़
मिला कई सुन्दर दृश्यों को देखने का मौका
अपनों का साथ सबसे अनोखा
गुरुओं की साथ सबसे निराली
जगाई दिल में ख़ुशी की कव्वाली
आपका गुस्सा और प्यार
थी आपके अपनेपन की बहार
आप ना होते तोह न होता हमारा सफ़र यादगार
करते रेह्जायेंगे ऐसे सफ़र का जीवन भर इंतज़ार
सफ़र हुआ ख़तम
सबकी आँखें है नम
यादोँ की बहार दिल में लिए हम
जी जायेंगे युही हम....................
