Tuesday, January 22, 2013


सिनेमा से बयां करते है कॉलेज का सफ़र


एक मंजिल से दुसरे मंजिल तक
न जाने क्या है क़यामत से क़यामत तक

कॉलेज में मिल गयी एडमिशन की टिकेट
जुड़ गयी दोस्ती उसी पल जब वी मेट

परिचय का सिलसिला शुरू ही हुआ था बस
मिल गए हसी बाटने वाले मुन्ना भाई एम् बी बी एस

होती है अगर दिन में सुस्ती
ले आते है दोस्त ज़िन्दगी में मस्ती

हर एक की ज़िन्दगी में ऐसा पल ज़रूर आता है
हर किसी के दिल में कुछ कुछ होता है

शुरू भी होता है आशिकी का तराना
हर कोई कहता है मैं हूँ ना

अटेंडेंस का हमेशा रहता है पगडा भारी
क्यों की येही मचाता है सफ़र में हेरा फेरी

खिली ही थी दिल में ख़ुशी की दिवाली
आ जाती है सामने परीक्षा की पहेली

साल भर घुमने बंक मारने का असर
परीक्षा पत्र दिखता है तारे ज़मीन पर

सवाल क्या था कभी समझे ना
जवाब सबसे पूछे जाने तू या जाने ना

फिर भी आगे पीछे जो हम डोलते रहे
किसी ने कहा लगे रहो मुन्ना भाई

ना जाने क्या पढ़ा क्या लिखा पर पड़ाव को पार कर
अंत में वही कहलाता है जो जीता वही सिकंदर

कॉलेज की यह ज़िन्दगी फिर न कभी होगी यारा
क्यों की ज़िन्दगी न मिलेगा दोबारा






1 comment:

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