Friday, February 8, 2013


ज़िन्दगी.................


लिख रहे है ज़िन्दगी का किताब 
हर दिन हो रहा है एक नया पन्ना बेनकाब 

रोज़ लिखते है अपने लिए अलग कहानी 
पर ज़िन्दगी लेती है अपनी अलग ही राह अनजानी 

ये तो तय कर लिया है क्या करना है हासिल 
पर ना जाने कहाँ मिलेगी हमे हमारी मंजिल 

है कुछ पाने की हम में कशिश 
कर रहे है हर वो कोशिश 

लेकिन हर कोशिश हो रही है नाकामियाब 
है कोई जो खोले हमारी कमजोरी का नकाब?

बनाना है अपने लिए अलग पहचान 
छोड जाना है दुनिया में अपना एक निशान 


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