ज़िन्दगी का सफ़र
सुहाना था बचपन हमारा,
था सभी का प्यार और सहारा/
जब दिखी हमारे चेहरे पे पहली हँसी,
खिल गयी सबके दिलों में ख़ुशी/
जिस खिलोने से हम ने खेला,
वो बन गया अन्मोल सोना/
जब हम ने अपना पहला कदम लिया,
उन्हें लगा हम ने दुनिया जीत लिया/
माँ की लोरी और पापा का गुस्सा,
थी ख़ुशी ज़िन्दगी का हिस्सा/
अब ज़िन्दगी के हर कदम पर मजबूर रह गए,
किसी की ख़ुशी के लिए खुद दुःख सह गए/
इस छोटी सी ज़िन्दगी में जाने कहाँ खो गए,
हर लम्हा खुद ही को ढूँढ़ते रह गए/
थी वो दुनिया हमारी जहाँ दिल खुश था,
अब ये है दुनिया हमारी जहाँ दिल खुश हो नहीं पाता/
क्यों हम बड़े हो गए,
सबके साथ रहते भी अकेले हो गए/
स्नेहा