Sunday, January 15, 2012

शुभ संक्रान्ती..........


रंगों से सजी है  रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/


है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/


हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/


हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/


तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/


न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/ 


गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/


न है  पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान, 
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/ 


है ये हर शहर वासी की कहानी, 
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................


संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)

Saturday, December 31, 2011

नया साल 


गुज़र गया जो कल,
याद आता है हर वोह पल/


याद है हर वो शाम, 
जो किया था दोस्तों के नाम/


ज़िन्दगी ने दिए कुछ नए मंजिल,
जिन राहों पर हुए कुछ खुशीआं हासिल/


जितने पल बिताये बच्चों को पढ़ाते ,
उतने ही पल बीताये खुद बच्चे बनते/


वो लड़ना झगड़ना वो छेड़ छाड़,
बन गया है सुहाना याद/


बिताये सभी पल अच्छे बुरे,
ज़िन्दगी ने थामा जब भी हम गिरे/ 


गुज़रा जो साल वो था दो हज़ार ग्यारा, 
दे गया वो ज़िन्दगी को किनारा /


२०११ बना ज़िन्दगी का ख़ास हिस्सा,
काश २०१२ का भी हो येही किस्सा /


आया है नया साल संग लेकर अपने ही कुछ पल,
पर भुला ना पाएंगे गुज़रा जो कल/   :) 


नए साल की हर्थिक सुभ कामनाये :)

Monday, December 5, 2011

दोस्त- दोस्ती 


दिल ने आवाज़ दी,ये अपने लगते  है /
मैंने पुछा क्या हम दोस्त बन सकते है?


दोस्ती हुई झगडे भी होते रहे/
दोस्ती के रंग गहरे होते गए/


पर तब किसी ने मुझसे पूछा,
क्यों लगता है ये दोस्त सच्चा?
ना था कोई जवाब जो लगता मुझे अच्छा/


दिल हुआ उदास, डरता है करते आभास/
ना जाने क्यों दोस्त होते है इतने ख़ास/
क्या वो कभी समझेंगे दिल की आवाज़?


thanks to someone who asked me this question for i was angry on someone and some one else questioned our friendship but must thank that person who asked this question may be for the inspiration if at all this is good :P



Sunday, November 20, 2011

दिल की आवाज़


मेरा दिल है मुझसे कहता/


क्यों तू हर पल दुखी रहता/


क्यों तू हर पल कुछ सोचता/


क्यों तू ज़िन्दगी से संघर्ष करता/


क्यों बीती बात है याद आता/


क्यों अकेले में आसों बहाता/


क्यों है तुझे हर बात की चिंता/


क्यों में कुछ कर नहीं पाता/


है तो यह दिल की आवाज़
दिल ही जाने या जाने खुदा/



Monday, October 31, 2011

नयी सफ़र 

एक नयी सुबह और एक नया सफ़र,
मंजिल पर टिकी है नज़र/

अन्जानी राहों ने खोले है बाहें,
कितनी भी मुश्किलें आये बढ़ना है अब हमें/

इस राह पर जाने क्या होगा हासिल,
फैसला कर पाना है मुश्किल/

बीता छोड़ आगे बढ़ना ज़िन्दगी का दस्तूर,
अब ये भी है हमे मंज़ूर/

निकल पड़े है नयी सफ़र पर, अन्जान से पहचान और मुश्किल का सामना करने,
ऐ खुदा बस इतना करदे दे जाना होंसला, जो निकले है अन्जान राह पर चलने/

Wednesday, October 26, 2011

शुभ दिवाली 


शुभ हो दिवाली दीयों की रौशनी के साथ ,
अमावस्य की रात तारों के ज़रिये चाँद से बात /
             
               लक्ष्मी पूजन की यह रात आजाये माँ सर पे रखने हाथ,
              बाटने प्यार और आशीर्वाद /

यह दीयों से रोशन रात संग पठाको  की बरसात लाये /
हर दिया उम्मीद लाये पठाके की ख़ुशी संग लाये /
छोड़ो डर बढ़ो आगे येही संदेसा लाये /
            
             रोशन हो ज़िन्दगी जैसे दीयों की यह रात,
             शुभ हो दिवाली दीयों की रौशनी के साथ /

सभी को दिवाली की हर्थिक सुभकामनायें .............

स्नेहा 

Saturday, October 22, 2011

ज़िन्दगी का सफ़र

सुहाना था बचपन हमारा,
था सभी का प्यार और सहारा/

जब दिखी हमारे चेहरे पे पहली हँसी,
खिल गयी सबके दिलों में ख़ुशी/

जिस खिलोने से हम ने खेला, 
वो बन गया अन्मोल सोना/

जब हम ने अपना पहला कदम लिया,
उन्हें लगा हम ने दुनिया जीत लिया/

माँ की लोरी और पापा का गुस्सा,
थी ख़ुशी ज़िन्दगी का हिस्सा/

अब ज़िन्दगी के हर कदम पर मजबूर रह गए,
किसी की ख़ुशी के लिए खुद दुःख सह गए/

इस छोटी सी ज़िन्दगी में जाने कहाँ खो गए,
हर लम्हा खुद ही को ढूँढ़ते रह गए/

थी वो दुनिया हमारी जहाँ दिल खुश था,
अब ये है दुनिया हमारी जहाँ दिल खुश हो नहीं पाता/

क्यों हम बड़े  हो गए,
सबके साथ रहते भी अकेले हो गए/

स्नेहा