Wednesday, May 23, 2012

प्यार
होता क्या है ये प्यार????
दो दिलों में टकरार, फिर इकरार, और फिर.........प्यार
शायद यही होता है प्यार......
मैंने ना जाना होता क्या है ये प्यार/
पर सुना तो बहुत कुछ है/
है ये भी एक सुनी सुनाई कहानी जो उतना ही मधुर था, जैसे फिल्मों में प्यार को दिखाया जाता है......साथ जीने मरने कि कसमें खाए थे, पर ना जाने कब बिछड़ गए/
है एक टूटे दिल के आन्सौं जो ना तो छुप  सकते ना ही बह सकते है,
तो आसुओं को तो इज़हार करना था अपने दिल हा हाल...........
कब आ गयी इतनी दूरियां,
ना सही जाए ये बेताबियाँ/
क्यों है मेरे दिल में अब भी तेरे लिए प्यार,
क्यों करती हूँ में अब भी तेरा इंतज़ार/
ना किया था कोई बेवफाई,
फिर क्यों दी मुझे ये तन्हाई/
हमारा प्यार किसी परीक्षा का मौताज नहीं,
कुर्बान हो प्यार तो ये ही सही/
ना कभी होगा ये प्यार कम.
तुम्हारा साथ खोया,...... बस इतना है घम/

फिर ना करेंगे कभी किसी से इतनी मोहोब्बत,
जो तुम ना कर पाए इसकी इबादत/
तुमसे बिछड़ कर यो जीना,
अच्छा  लगेगा मर जाना/
प्यार खोया ज़िन्दगी खोयी,
ना करेंगे प्यार कभी येही सीख है पायी/
दिल आखिर तू क्यों रोता है,
शायद प्यार का अंत युही होता है............

Sunday, April 15, 2012

मेरी कहानी.......

ना जाने क्यों ऐसा लगा जैसे मैंने इतने दिनों के जीवन में ना कुछ पाया है लेकिन बहुत कुछ ख़ोया हैं....... जब से मैंने ज़िन्दगी को समझा उस दिन से बस समझौता ही था मेरी ज़िन्दगी में ......कभी अपने आप को मैंने समझाया तो कभी किसी और ने.... पर ऐसा एक पल मुझे याद नहीं जहाँ में और बस में थी..... हमेशा किसी और ने मेरी ज़िन्दगी के फैसले लिए और उनकी ख़ुशी के खातिर मैंने मान भी लिया पर उन्होंने कभी ये नहीं सोचा की मेरी भी कुछ इत्छाएं है जिनके लिए में जी रही हूँ......


ये है मेरी कहानी,
बेजान दिल की जुबानी,
तन्हाई की निशानी/

दिल में सन्नाटा लिए,
ना जाने कहाँ हम चल दिए/

दुनिया से आंसू छुपाते,
ना मिला कोई जिसे अपना दर्द बता पाते/

जिसे सुनाया उसने मज़ाक बनाया,
तो इंसानियत का क्या मतलब रह गया/

ख़ुशी सब ने बांटा दर्द ना बाँट सका कोई,
अपना और पराया क्या समझा पायेंगे हमे कभी/

जिसे अपना माना उसने भी बेगाना बनाया,
उस से क्या शिकायत करना जब अन्जान हो गया है खुद का साया/

जब सब ने हमें ठुकराया,
तब आंसुओं ने साथ हर पल निभाया/

बस अकेले रह गए इस राह पर,
ना चाहेंगे किसी का साथ ज़िन्दगी भर/

तन्हाई बन गयी है मेरी साथी,
अब उसी से है हर खुसी मिल जाती/

बस ये है मेरी कहानी,
तन्हा है जिंदगानी..................

Saturday, April 14, 2012

मेरा राजकुमार.... :)


दिल का है ये पैगाम,
जो होगा किसी एक के नाम/


होगा कोई खुशनसीब,
जो होगा मेरे दिल के करीब/


समझे मुझे जैसे मेरा दर्पण,
कर दूँगी उसे अपना जीवन समर्पण/

ना होगा कुछ भी मेरा या तेरा,
होगा सब कुछ बस हमारा/



चाहू ऐसा इंसान जो करे मुझ से बेहत प्यार,
चाहे करना पड़े उसके लिए ज़िन्दगी भर इंतज़ार,
उस से मिलने को यह दिल बेकरार,
ना जाने कहाँ है वो मेरा राजकुमार.......


Friday, April 6, 2012


मीठा एहसास


है एक सुहानी शाम की बात,
हुई है बिन मौसम बरसात/


दिल में है सन्नाटा छाया,
पता नहीं घने बादल ने क्यों दिल को घबराया,
क्यों है ज़िन्दगी पर घम का साया/


वक़्त ने एहसास दिलाया,
तुने हर पल बुरा नहीं पाया,
मैंने ख़ुशी को संग है लाया/


एक अजीब सी खुशबू मेरी बाहों में भर गयी,
ना जाने क्या है जो दिल में ख़ुशी का एहसास छोड़ गयी/


मौसम ने जगाया दिल में प्यार,
काश हमारा भी होता ऐसा कोई दिलदार,
जिस से करना चाहे हम प्यार का इज़हार,
है ऐसे प्यार का इंतज़ार/


उस पल हर घम हमसे दूर था,
बस जीने का एहसास संग था,
और वो मेरी बाहों में था/


दिल कुछ और तो नहीं चाहता,
बस वक़्त उस पल थम जाता/


हर बारिश की बूँद हमे छेड़ता,
कर दिया था अपना जीवन उसे समर्पण,
तोह क्या हवा और क्या बारिश,
कोई ना हमे अलग कर पाता/


इस दुनिया में सच्चा प्यार था हमने पाया,
पर ऐसा लगा जैसे किसी ने है आवाज़ लगाया,
सच्चाई को था हमने जो ठुकराया/


ज़िन्दगी उस ही मोड़ पर वापस आ गयी,
जहाँ यह सपना वो छोड़ गयी/


अब हमे जीने का एहसास हो गया,
उस प्यार को तो बस सपने में ही है पाया/


सपना हुआ ख़तम मंजिल था आगे,
आ गए है फिर उसी दोराहे.........................

Sunday, April 1, 2012

देखा एक सपना


दिल ने चाहा मौत को गले लगाना,
पर भगवान् ने कहा जीवन है तुझे बिताना/

ना है कोई अपना ना कोई पराया,
क्या ऐसी ही दुनिया तुमने है बनाया/

क्या है दोस्ती और क्या प्यार,
जब हर कोई है सिर्फ अपने लिए बेकरार/

दिल ने पुछा जब ना कोई अपना ना कोई अंजाना,
तो कैसे है ज़िन्दगी को बिताना,
उसने कहा अब साया भी बन जाएगा बेगाना,
पैसे ने बना दिया सबको दीवाना/

ऐसी दुनिया तोह में जानता नहीं,
पर येही है वोह दुनिया तो सही/

मैंने चाहा बनाना बाघ जहां खिलेंगे फूल,
पर ना था पता दिल के रिश्तों पे ऐसे जम जाएगा धूल/

क्यों सुना रहे हो मुझे ये किस्सा,
कर दो मेरे सपने का पूरा हिस्सा/

में ज़िन्दगी देना जानू ना लेना,
खेल को है पूरा होना,
तो इंतज़ार है तुझे करना/

ना हुआ कोई सपना पूरा,
है ये जीवन अधूरा/

था ये भी एक सपना जो ना जाने कब पूरा होगा,
इंतज़ार इंतज़ार और बस इंतज़ार........यह भी ना हमसे अब होगा.....

जीवन के इस सफ़र मं अगर जीने  का हक नहीं तो मरने का भी नहीं,
खेल तो मैंने रचा है ख़तम तो यु होगा नहीं,
इंतज़ार हो ना हो बस वही है इस पल के लिए सही/

Sunday, January 15, 2012

शुभ संक्रान्ती..........


रंगों से सजी है  रंगोली,
गाँव को जत्चती है हरियाली/


है किसानो का ये पर्व,
भारत वर्ष के है जो गर्व/


हर वो पहली फसल लाये ख़ुशी की सरगम,
आस्मान में है पतंगों का संगम/


हर पतंग का कटना और फिर पेंच लगाना,
ज़िन्दगी को भी है इसी तरह आगे बढ़ाना/


तीन दिन का यह पर्व लाये दिलों में उमंग,
दे जाए ज़िन्दगी में एक नयी तरंग/


न मिलता यह सब इस शहर में,
मिल भी जाए तो न है उस उमंग में/ 


गाँव में सुनेहरा हर त्यौहार,
शहर में है बस छुट्टी का इंतज़ार/


न है  पर्व का उमंग न पतंग की उड़ान, 
क्यों बन गयी है ज़िन्दगी मशीन की तरह बेजान/ 


है ये हर शहर वासी की कहानी, 
मिल जाए ज़िन्दगी में खुशहाली.....................


संक्रान्ती की हर्थिक शुभ कामनाएँ :)

Saturday, December 31, 2011

नया साल 


गुज़र गया जो कल,
याद आता है हर वोह पल/


याद है हर वो शाम, 
जो किया था दोस्तों के नाम/


ज़िन्दगी ने दिए कुछ नए मंजिल,
जिन राहों पर हुए कुछ खुशीआं हासिल/


जितने पल बिताये बच्चों को पढ़ाते ,
उतने ही पल बीताये खुद बच्चे बनते/


वो लड़ना झगड़ना वो छेड़ छाड़,
बन गया है सुहाना याद/


बिताये सभी पल अच्छे बुरे,
ज़िन्दगी ने थामा जब भी हम गिरे/ 


गुज़रा जो साल वो था दो हज़ार ग्यारा, 
दे गया वो ज़िन्दगी को किनारा /


२०११ बना ज़िन्दगी का ख़ास हिस्सा,
काश २०१२ का भी हो येही किस्सा /


आया है नया साल संग लेकर अपने ही कुछ पल,
पर भुला ना पाएंगे गुज़रा जो कल/   :) 


नए साल की हर्थिक सुभ कामनाये :)