Thursday, November 1, 2012

ख्वाइश .......

आया मन में एक अजीब ख्याल ,
था अपने आप से एक सवाल /

खयालो को मिल गया एक ज़रिया ,
कागज़ बन गया मेरा सहारा /


मनुष्य का रूप जो है लिया ,

दिल को है तनहा पाया ,
आसुओं को है अपनाया, 
क्या येही है मानव रूप की माया?

अगर में कलम होती ,
कवी के हाथों में शोभा देती /

अगर कागज़ होती 
बच्चे की हात में नाँव बनके ख़ुशी बटोरती 

अगर फूल होती ,
चंद पल के जीवन में कई दिल लुभाती /

अगर कोई खिलौना होती ,
खेलने वाले की मासोमिअत में खो जाती /

अगर बरसात के रूप में बहती ,
कई दिलों की तन्हाई की साथी बनती/ 

अगर होती कोई परिंदा,
उड़ जाती कहके सबको अल्विदा/ 

लेकिन मानव रूप मैं क्या है मैंने पाया??
टूटे ख्वाबोँ को पूरा करने का है कोई ज़रिया ???

में तो चाहू कलि से भूल बनू ,
चन्द पलों की ज़िन्दगी में दिलों में प्यार भरूं /

कुछ और तो न चाहू ,
चंद  पल जीयु और मुर्झाऊ ,
दिल की सुकून अपने साथ ले जाऊ /

ख्वाइशों से भरा ये बावरा मन,
ना अपनाना चाहे ये जीवन.........

Monday, October 8, 2012



इंतज़ार ...........


सुहाना है मौसम 
बारिश के बूंदों की ये सरगम 
हवा भी चले है मद्धम 
अनोखा लगे ये संगम 
झूमने लगा है मन भुलाके अपने सारे घम 
चाहे साथ हो कोई हमदम 
हमारी नैनों में है शर्म 
आपकी इंतज़ार में आँखें है नम 
इस प्रकृति के मंडप में एक हो जाए हम 
भुलाके सारी दुनिया इस रिश्ते की मिठास में ही खो जाए हम

Tuesday, September 18, 2012

जिंदा हूँ में..............


देखा इंसान की बदलती फिदरत, 

जिस से पाया था प्यार  उसी  से  पायी  नफरत,
इन  एहसासों में  अगर  कही  हूँ  में, 
तो जिंदा  हूँ  में...........

मेरी दुःख के तिन्के,
आँखों से तेरी छल्के, 
उन आंसुओं में मेरी याद है छुपी,
तो जिंदा हूँ में..............

मौत अगर आजाए तो कोई घम नहीं,
अपनों के दिल में अगर छुपी हूँ कही,
तो जिंदा हूँ में..................

Saturday, September 15, 2012


एम् .बी .ए 


ऊँचाई पाने की सफ़र में आया एम् .बी .ए .
अब लगता है क्यों आया ये पड़ाव ज़िन्दगी में

बनाने चले थे दुनियां में अपनी अलग पहचान
बन कर रह गए है अलग इंसान

ना जाने कहाँ गयी वो दिलों की मासूमीअत
देखने लगे है एक दुसरे में ज़रुरत

रिश्तों में ना है कोई ऐसी एहसास
जो छेड़े दिलों में अपनेपन का साज़

दिल से जोड़े थे हमने रिश्ते
पर इन रिश्तों में देखा अपने ही दिल को पिसते

गलत लगने लगा है हर फैसला
मनो ज़िन्दगी ले रही है बदला

दिल और दिमाग की लड़ाई
कर दिया है दिल की बिदाई

अब न रहा मौका न रही वो दस्तूर
बर्दाश करना पड़ेगा अपने इस फैसले का कसूर
रह गए है इस फैसले के साथ जीने के लिए मजबूर..........................

Tuesday, September 11, 2012


दोस्ती के नाम यह पैगाम .......


ज़िन्दगी की कश्ती में ,

बहते चले थे मस्ती में /

हर मोड़ पर थी एक नयी चाहत, 

जिसने लायी थी दिल में घबराहट/ 

नयी जगह और थी नयी मंजिल ,

दिल की ख़ुशी जो करनी थी हासिल/ 

मेरे इस सफ़र में आप न जाने कब जुड़ गए, 

दोस्ती के फूल ना जाने कब खिल गए /

इस फूल से है एक ही कामना ,

न तुम कभी मुरझाना /

अकेले जो निकल पड़े है इस राह पर, 

मिल जाए साथ दिलों की हमे अगर ,
जी लेंगे ज़िन्दगी युही हसकर /

Tuesday, August 21, 2012


:) :(

साथ  की थी हमने कितनी शरारतें,
अब दिल में है क्यों इतनी नफरतें /

राहों के काँटों को सहते ,
दिल्लगी हम निभाने चले थे, 
दिल की बात को सुनते ,
हकीकत को अनदेखा करते, 
हर दिन एक नयी मौत हम थे मरते/ 

दिल में कई सवाल ,
जो मचाये ज़िन्दगी में बवाल/ 

हर क्यों का जवाब नहीं होता ,
टूटे दिल को जोड़ना आसान नहीं होता /

अपने कब्र पर हमने चन्द आसूं बहा लिया, 
दिल को पत्थर बना कर अब हमने है जीना सीख लिया.................... 

Thursday, June 21, 2012



मेरा पहला प्यार 

तुम से  थी  ज़िन्दगी में  बहार, 
अब  सब  कुछ  लगता  है  बेकार, 
तुम  थे  मेरे  पहले  प्यार, 
ना  मिल  पाएंगे  हम  कभी....  
यह  सच  को  करना  चाहूं  इनकार/ 

है  यह  हम  दोनों  की  कहानी, 
में  हूँ  तेरे  दिल  की  वाणी, 
साथ  बितायी  हर  पल  सुहानी/ 

आसमान  बना  आइनाँ,
दिखाए  अपने  प्यार  की  निशानियाँ, 
हर  पत्ता  जाने  दिल  की  सिसकियाँ/ 

तेरी  परछाई  में  बीती  हर  रात, 
वो  तारे  भी  करते  अपनी  ही  बात/ 

तेरे  पत्तों  की  महक  और  फलों  की  मिठास, 
तुझे  बनाये  सबसे  ख़ास/ 

तू  ना  कभी  मेरे  बाँहों  में  समा  पाया, 
फिर  भी  इस  दिल  में  जगह  कर  गया/ 

मेरे  आँगन  का  था  तू  राजकुमार, 
बना  मेरा  पहला  प्यार/ 

प्रकृति  का  तू  एक  रंग, 
लाया  था  मेरी  ज़िन्दगी  में  तरंग, 
समा  गया  होकर  उन्ही  का  एक  अंग, 
ले  गया  मेरी  हर  राज़  अपने  संग/ 

अलग  थी  अपनी  कहानी, 
अभी  भी  हूँ  तुम्हारी  दीवानी/ 

थे  तो   तुम  एक  पेड़, 
नन्ही  कली के  दिल  को  तुमने  था  छेड़/

जगाया  मेरे  दिल  में  प्रेम  की  भावना, 
किया  था  मैंने  तेरे  संग  ज़िन्दगी  की  कामना/ 

बचपन  की  मासोमियत, 
बनाए हमारे  प्यार  को  खूबसूरत, 
भुला  देना  भी  थी  उस  उम्र  की  खासियत/ 

ना  कभी  थकता  ना  मेरी  बातों  पे  बिगड़ता, 
तेरे  बिना  यह  बचपन  से  जवानी  का  सफ़र  तो  तय  नहीं  होता/ 

अब  खलती  है  मुझे  तेरी  कमी, 
ना  मिला  कोई  जिसे  सुना  पाए  दिल  का  सभी/ 

हमे  ज़िन्दगी  के  सुख  देने  हुआ  तू  कुर्बान, 
अब  समझी  तेरा  प्यार  था  कीतना  महान, 
तुझसे बिछड़ हम  हुए बेजान/ 

तुझ  जैसा  साचा  साथी  ना  मिलेगा  मुझे, 
पर  काट  दिया  बेरहमी  से  तुझे/ 

ना  कुछ  माँगा  ना  बोला, 
क्यों  छोड़  गया  मुझे  यु  अकेला ???