अलार्म क्लॉक
क्यों सभी करते है मुझसे नफरत
फिर भी हूँ में उनकी ख़ास ज़रुरत
थक जाता हूँ पर नहीं पूरा होता मेरा काम
हर कोई देता है मुझे इल्ज़ाम
फिर भी नहीं मानता में हार
कोशिश करता ही रहता हूँ बार बार
खा कर उनके कई मार
उनके आँखों का रंगीन सपना तोडू, नहीं लगता मुझे अच्छा
पर क्या करे उनकी भी होती है यही इच्छा
मिलता है मुझे उनसे सिर्फ गुस्सा
बस वही है मेरी ज़िन्दगी का किस्सा
फिर भी हर सुबह सुन्ना चाहते है वो मेरी आवाज़
छेड़ता हूँ उनके ज़िन्दगी में हर दिन एक नयी साज़
उनके ठोकरे खा कर भी बजाता हूँ उनके कानों में टिक टॉक
में हूँ उनका अलार्म क्लॉक
मिलता है मुझे उनसे सिर्फ गुस्सा
बस वही है मेरी ज़िन्दगी का किस्सा
फिर भी हर सुबह सुन्ना चाहते है वो मेरी आवाज़
छेड़ता हूँ उनके ज़िन्दगी में हर दिन एक नयी साज़
उनके ठोकरे खा कर भी बजाता हूँ उनके कानों में टिक टॉक
में हूँ उनका अलार्म क्लॉक
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