Saturday, September 15, 2012


एम् .बी .ए 


ऊँचाई पाने की सफ़र में आया एम् .बी .ए .
अब लगता है क्यों आया ये पड़ाव ज़िन्दगी में

बनाने चले थे दुनियां में अपनी अलग पहचान
बन कर रह गए है अलग इंसान

ना जाने कहाँ गयी वो दिलों की मासूमीअत
देखने लगे है एक दुसरे में ज़रुरत

रिश्तों में ना है कोई ऐसी एहसास
जो छेड़े दिलों में अपनेपन का साज़

दिल से जोड़े थे हमने रिश्ते
पर इन रिश्तों में देखा अपने ही दिल को पिसते

गलत लगने लगा है हर फैसला
मनो ज़िन्दगी ले रही है बदला

दिल और दिमाग की लड़ाई
कर दिया है दिल की बिदाई

अब न रहा मौका न रही वो दस्तूर
बर्दाश करना पड़ेगा अपने इस फैसले का कसूर
रह गए है इस फैसले के साथ जीने के लिए मजबूर..........................

Tuesday, September 11, 2012


दोस्ती के नाम यह पैगाम .......


ज़िन्दगी की कश्ती में ,

बहते चले थे मस्ती में /

हर मोड़ पर थी एक नयी चाहत, 

जिसने लायी थी दिल में घबराहट/ 

नयी जगह और थी नयी मंजिल ,

दिल की ख़ुशी जो करनी थी हासिल/ 

मेरे इस सफ़र में आप न जाने कब जुड़ गए, 

दोस्ती के फूल ना जाने कब खिल गए /

इस फूल से है एक ही कामना ,

न तुम कभी मुरझाना /

अकेले जो निकल पड़े है इस राह पर, 

मिल जाए साथ दिलों की हमे अगर ,
जी लेंगे ज़िन्दगी युही हसकर /

Tuesday, August 21, 2012


:) :(

साथ  की थी हमने कितनी शरारतें,
अब दिल में है क्यों इतनी नफरतें /

राहों के काँटों को सहते ,
दिल्लगी हम निभाने चले थे, 
दिल की बात को सुनते ,
हकीकत को अनदेखा करते, 
हर दिन एक नयी मौत हम थे मरते/ 

दिल में कई सवाल ,
जो मचाये ज़िन्दगी में बवाल/ 

हर क्यों का जवाब नहीं होता ,
टूटे दिल को जोड़ना आसान नहीं होता /

अपने कब्र पर हमने चन्द आसूं बहा लिया, 
दिल को पत्थर बना कर अब हमने है जीना सीख लिया.................... 

Thursday, June 21, 2012



मेरा पहला प्यार 

तुम से  थी  ज़िन्दगी में  बहार, 
अब  सब  कुछ  लगता  है  बेकार, 
तुम  थे  मेरे  पहले  प्यार, 
ना  मिल  पाएंगे  हम  कभी....  
यह  सच  को  करना  चाहूं  इनकार/ 

है  यह  हम  दोनों  की  कहानी, 
में  हूँ  तेरे  दिल  की  वाणी, 
साथ  बितायी  हर  पल  सुहानी/ 

आसमान  बना  आइनाँ,
दिखाए  अपने  प्यार  की  निशानियाँ, 
हर  पत्ता  जाने  दिल  की  सिसकियाँ/ 

तेरी  परछाई  में  बीती  हर  रात, 
वो  तारे  भी  करते  अपनी  ही  बात/ 

तेरे  पत्तों  की  महक  और  फलों  की  मिठास, 
तुझे  बनाये  सबसे  ख़ास/ 

तू  ना  कभी  मेरे  बाँहों  में  समा  पाया, 
फिर  भी  इस  दिल  में  जगह  कर  गया/ 

मेरे  आँगन  का  था  तू  राजकुमार, 
बना  मेरा  पहला  प्यार/ 

प्रकृति  का  तू  एक  रंग, 
लाया  था  मेरी  ज़िन्दगी  में  तरंग, 
समा  गया  होकर  उन्ही  का  एक  अंग, 
ले  गया  मेरी  हर  राज़  अपने  संग/ 

अलग  थी  अपनी  कहानी, 
अभी  भी  हूँ  तुम्हारी  दीवानी/ 

थे  तो   तुम  एक  पेड़, 
नन्ही  कली के  दिल  को  तुमने  था  छेड़/

जगाया  मेरे  दिल  में  प्रेम  की  भावना, 
किया  था  मैंने  तेरे  संग  ज़िन्दगी  की  कामना/ 

बचपन  की  मासोमियत, 
बनाए हमारे  प्यार  को  खूबसूरत, 
भुला  देना  भी  थी  उस  उम्र  की  खासियत/ 

ना  कभी  थकता  ना  मेरी  बातों  पे  बिगड़ता, 
तेरे  बिना  यह  बचपन  से  जवानी  का  सफ़र  तो  तय  नहीं  होता/ 

अब  खलती  है  मुझे  तेरी  कमी, 
ना  मिला  कोई  जिसे  सुना  पाए  दिल  का  सभी/ 

हमे  ज़िन्दगी  के  सुख  देने  हुआ  तू  कुर्बान, 
अब  समझी  तेरा  प्यार  था  कीतना  महान, 
तुझसे बिछड़ हम  हुए बेजान/ 

तुझ  जैसा  साचा  साथी  ना  मिलेगा  मुझे, 
पर  काट  दिया  बेरहमी  से  तुझे/ 

ना  कुछ  माँगा  ना  बोला, 
क्यों  छोड़  गया  मुझे  यु  अकेला ???

Sunday, June 10, 2012



बरसात........ :)


सावन की पहली बरसात,
वाह..!!!!!!!!!!!!!  लाये नयी उमंग  अपने साथ/

गर्मी से थी बड़ी आफत,
अब मिलेगी थोड़ी राहत/

झूम उठा बाँवरा मन,
जैसे मोरनी हो उसकी दर्पण/

वो काले घने बादल,
लगे जैसे ममता की आँचल/

वो बादलों की खनक,
मिट्टी की महक,
बूंदों की वो छनक, 
ख़ुशी दे रही है दस्तक/

कहते है इसे प्यार का मौसम,
याद आता है गानों  का सरगम/

बरसात के बाद चांदनी,
बन जाए उस पल संगिनी/

दिलदार से करते दिल की बात,
और गरमा गरम पकोड़े हो साथ/

दिल झूम जाए ख़ुशी से, 
ना है कोई और उम्मीद इस पल से/

आ गया है सावन,
कुछ और ना चाहे ये पागल मन/


Friday, June 8, 2012

शब्द नहीं......


कहता है दिल मेरा बहुत कुछ ,
पर बयान करना चाहू तो शब्द नहीं/
घर के हर कोने में बसी है कई यादें ,
उन यादों को ऐतबार करने के लिए भी शब्द नहीं/
वोह चाँद तारों से बातें करते रात का गुज़र जाना,
अब अपने तनहाइयों से बात करने के लिए भी शब्द नहीं/
आँखों से आंसू चलके जैसे कोई जाम ,
उस आंसुओं को रोकने के भी शब्द नहीं /

ज़िन्दगी के हर मोड़ पर शब्दों का यु साथ छोड़ देना,
क्या शब्द ही है जो कर पाए भावना इज़हार ,
दिल की बातें तोह आँखों से बयान होती है ,
शब्द ना हो तो क्यों रुक जाती है ज़िन्दगी?
शब्द न हो क्यों आ जाती है दूरियां?
क्यों हर एहसास को शब्दों में बयान करना पड़ता है?

ना समझा पाउंगी किसी को अपने दिल का हाल
क्यों की मेरे पास शब्द ही नहीं।................



Tuesday, May 29, 2012



आसमान की परी 


 आशियाना ढूँढती हुई
आ पहुंची हूँ किसी घरोंदे में
ज़िन्दगी की तलाश में भटकती
सन्नाटे की आह में सिसकती
दर्द की आवाज़ है गूंजती मेरी कानों में
उड़ने कि चाह लिए निकल पड़ी थी
पंख है फडफडाते, थक चुके हार चुके
पर ना मिला मेरा कोई आशियाना
आसमान में ही हूँ फिर भी मंजिल दूर है
उन्से क्या कहे जो मेरे साथ उड़ना चाहते है
फिर भी कहते है मुझे आसमान की परी........:)