Saturday, May 18, 2013

माँ 

जिसकी लोरी सुनके ही सोते थे
जिसके बाहों में हम बड़े हुए
जिसने हमारे सपनों को अपनी आँखों में देखे

जिसने हमे सही गलत का मतलब सिखाया
जिसने हर पल हमारा साथ निभाया
जिसने हमे प्यार का मतलब समझाया

जो है सुख दुःख में हमेशा मेरे साथ
ना छुपा है जिससे कोई भी बात

जिसने मेरे सपनों को उड़ान दिया
समाज में मुझे एक पहचान दिया

आज भी जिसके गोद में सोने की रहती है इच्छा
कहाँ किसी से मिलेगा प्यार इतना सच्चा

जिसके हात के खाने में हो अमृत का स्वाद
जिसके संग मिले ख़ुशी और आह्लाद

जिस से मिले जीने की मकसत
जिस से मिले हर दर्द में लड़ने की ताकत

दे कर हर ख़ुशी ना रखती हमसे कोई भी आस
येही है माँ के ममता का राज़

कहते है बच्चे होते है भगवान का रूप
लेकिन माँ तू तो है उन्ही का स्वरुप

माँ---- मेरे दिल के भावनाओं को ना मिले शब्दों का साथ
लेकिन तू तो जाने मेरे दिल की हर बात 

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