Sunday, July 26, 2015

Proud Hyderabadi!!!!

nahi thakti karte is sheher ka varnan
bhinnata mein ekta ka jo hai darpan

is sheher mein dikhe hai nawaabi aan baan aur shaan
ek alag hi hai hamari pehchaan

alag hi hai hamari bhasha
kaiyo ne kaha hai isme hai ek alag sa nasha

is sheher ka haleem ho ya biryani
uska swaad hai har kisi ki zubaani

hamare sheher ke har kone mein basa hai itihaas
hume dilaye nawabi shaan ka ehsaas

itihaas ko sang lekar apnayi hai adhunikta
hamaare itihaas ki hai itni mahaanta

kehne wale phir bhi kehte hai hindu muslim jhagdo ki tum dilaaye yaad
par bhaaichaare ki bhi lagayi hai humne hi buniyaad

jahan eid par hindu bhai karte hai iftaar ka aayojan
wahi ganesh nimarjan par hamare hi musalmaan bhai karte hai prasad ka prabhandhan

vibhinn rashtra vaasiyon se hai hamara ye sheher aabaad 
garv se kehte hai hamara sheher hai hyderabad !!!!

Wednesday, July 15, 2015

Badhna hi hai zindagi!!!!!

kyon dete hai hum un yaadon ko itni ehmiyat
jinki nahi reh gayi zindagi mein koi khaasiyat

mat karo un rishton ki itni kadar, jinka nahi raha ab koi astitv
khaas the wo magar, ab nahi raha unka koi daayitv

un beete yaadon ko jeene ki na karo kabhi khwaaish 
bhula sake un yaadon ko karna hai wahi koshish

maana bhula paana hai mushkil 
par kyon rakhe hum unhe yaad, jinse nahi judi hai hamare khushiyon ki saahil

jeena hai hume banakar dil ko sakht
na kar kisi ka intezaar, kyon ki tum hi badal sakte ho apna waqt.....

Wednesday, July 1, 2015

अलार्म क्लॉक 

क्यों सभी करते है मुझसे नफरत 
फिर भी हूँ में उनकी ख़ास ज़रुरत 

थक जाता हूँ पर नहीं पूरा होता मेरा काम 
हर कोई देता है मुझे इल्ज़ाम 

फिर भी नहीं मानता में हार 
कोशिश करता ही रहता हूँ बार बार 
खा कर उनके कई मार 

उनके आँखों का रंगीन सपना तोडू, नहीं लगता मुझे अच्छा 
पर क्या करे उनकी भी होती है यही इच्छा 

मिलता है मुझे उनसे सिर्फ गुस्सा 
बस वही है मेरी ज़िन्दगी का किस्सा 

फिर भी हर सुबह सुन्ना चाहते है वो मेरी आवाज़ 
छेड़ता हूँ उनके ज़िन्दगी में हर दिन एक नयी साज़ 

उनके ठोकरे खा कर भी बजाता हूँ उनके कानों में टिक टॉक 
में हूँ उनका अलार्म क्लॉक 

Monday, June 15, 2015

Waqt pe nahi chala hai kabhi kisi ka zor

kisi ki yaad mein is kadar kho gaye hum
Nahi samjhe kab khud se door ho gaye hum

nahi dekhna chahti thi asliyat
par dimaag kar raha tha shikayat
nahi badal saki jo tha haqueekat

guzare waqt par likh diya tha kisi ka naam
wo hi ho gaya zindagi se gumnaam

aansuon se hi mila hume sahaara
badalte mausam se mila zindagi mein ujiyaara

phir bhi dil mein aaj bhi kabhi hoti hai beete kal ki shor
waqt pe nahi chala hai kabhi kisi ka zor.......!!!!!

Saturday, May 16, 2015


शादी 

तंग आ गयी हूँ सुनके ये शादी का नारा 
क्या शादी ही है मेरी ज़िन्दगी का सहारा 

कौन बता सकता है शादी के लिए सही उम्र 
कुछ और दिन अकेली रहना चाहती हूँ, क्या है कोई जुर्म?

हर दिन कोई ना कोई ले आता है नया रिश्ता 
क्यों नहीं समझते मेरा दिल भी है इसमें पिस्ता 

शादी.......... इस रिश्ते को निभाने चाहिए मुझे हिम्मत और होसला 
क्यों कर रहे हो जल्दबाज़ी लेने ये एहम फैसला 

क्यों हर किसी को है मेरी ज़िन्दगी की फ़िक्र 
ऐसी फ़िक्र जिसमे नहीं आता कही मेरा ज़िक्र 

इन कई नये रिश्तों को निभाने नहीं हूँ मैं तैयार 
करो मेरे भी फैसले का कुछ तो करार 

हर वक़्त शादी रिश्तों का क्यों खोल कर बैठते हो किताब  
शादी नहीं है मेरे इत्छाओं का जवाब 

सच्चे दिल से करना चाहती हूँ इस रिश्तें का दीदार 
दे दो मुझे थोड़ा वक़्त, कर सकू  अपने आप को तैयार 

Friday, May 15, 2015

Happy Mother's day!!!!

ना डरना कभी 
ना रुकना कभी
ना थमना कहीं 
ख़ुशी हो या घम, अपनाना सभी 
हर पल है तेरे लिए एक नयी ज़िन्दगी 

तोड़ दे वो नियम जो बने तेरी मन्ज़िल में रुकावट 
उनके प्रभाव भी सहने की रख तू हिम्मत 

दुनिया को बदलने की ना कर यत्न 
अपने फैसलों पर डटे रहने की कर प्रयत्न 

चुन वही राह जिससे मिले तेरी खुशियों की साहिल 
हर मुश्किल का सामना कर पाना अपनी मंज़िल 

खुदी पर कर विश्वास, बनेगा वही तेरी ताकत 
ना तोड़ पायेगा कोई तेरी हिम्मत 

लड़की है तू, पर नहीं है कमज़ोर 
करे कोई ऐसी बात, ना ध्यान देना उस ओर 

दुनिया देगी तेरा साथ, ना कर ऐसी कामना 
ना रख उम्मीद की तेरी इरादो की मिले सराहना 
भारतीय नारी का जन्म से पाया है तूने खिताब 
ज़रूरी नहीं आज भी तू पहने वही नक़ाब 

ढून्ढ लेना तू अपनी ख़ुशी 
वही है तेरी ज़िन्दगी 

लड़की हूँ, में भी रखती हूँ ऐसी सोच 
ऐ माँ!!! काश तू ना करती मेरा साथ देने कोई संकोच 

ऐ माँ !!! लेने दे तेरी बेटी के सपनोँ को उड़ान 
बनाने दे उसे अपनी ज़िन्दगी में सफलता के निशान 

भारतीय नारी के आपके परिभाषा से अब आती है बस रीक 
ऐ माँ !!! ना दे अपनी बेटी को तू सहमी भारतीय नारी बने रहने के सीख 

ऐ माँ!!! अपनी बेटी पर ना डाल वही बन्दिशें 
जिनके कारण पूरी ना कर सकी तू अपनी ख्वाइशें 

Sunday, May 10, 2015

नहीं रुकि उसके आँखों से बहती धारा 
वही दे रहे है उसे दर्द में सहारा 

सजाया था उसने जो एक सुन्दर सपना 
चूर  चूर कर गया उसे उसका ही कोई अपना 

करने जा रही थी नए रिश्तें की शुरुवाद 
शुरू होने से पहले ही डगमगा गयी उसकी बुनियाद 

नहीं कर पायी दूर अपने दिल से वो यादेँ 
आज भी हर रात सताती है उसे वही बातें 

खो गयी है उससे चैन की रातें 
कितने पल गुज़ारे है दर्द में बिलखते 

काश वो समझ पाता उसके मन की व्यथा 
काश दूर हो पाती उन दोनों के मन  दुविधा 

काश मान लेता वो उसकी मिन्नतें 
जताता उस से अपनी चाहतें 
सवार गए होते कई रिश्तें 

पर  नहीं है कोई गलत कोई भी दोषी 
दूर हो गयी है दोनों के दिल की ख़ुशी 

सुनाई दे रहे है दिलों के टूटने की खनक 
काश वही से मिल जाए उन्हें नए खुशियों की दस्तक