Thursday, March 14, 2013

एम् बी ऐ का सफ़र 

सफ़र का पहला दिन 
शुरू हुआ क्यों एम् बी ऐ के जवाब के बिन 

ढूंढना तो था इस सवाल का जवाब 
पर वक़्त ने बना दिया हमे ज़िन्दगी का नवाब 
बुन ने लगे थे अलग ही ख्वाब 

वक़्त ने बिछादिया खुशियों का ढेर 
न कर सका उसका तोल कोई भी सेर 

समा लिया था यादों की दुनिया 
लेकिन अलग था  हकीकत का आशियाँ 

इसी मस्ती में ना जाने कैसे गुज़र गए दिन 
मन के तरंग में सतरंगी पलछिन 

किताब के हर पन्ने पे है यादों की छवि 
हर पल ने बना दिया हमे और भी अनुभवी 

दोस्तों से हर झगडे की याद भी ला देगा चेहरे पे हसी 
ऐसी गहरी है दिल में यादें बसी 

अब बस रह गए है चंद  पल 
ना जाने क्या लाएगा आने वाला कल 

छात्र से बन जायेंगे पेशेवार 
न होगी रंगों की ये बहार 

पीछे मुड के जो हमने देखा 
हाँ हमने है बहुत कुछ सीखा 
लेकिन उस पहले दिन के सवाल का जवाब आज भी है फीखा 
अब कोई हमसे पूछे क्यों एम् बी ऐ तो जवाब मिलेगा तीखा 



Tuesday, March 12, 2013

टेक्नोलॉजी की दुनिया 

जनम से मरण तक का सफ़र 
कंप्यूटर की दुनिया में आता है नज़र 
कभी सोचा क्या होगा इसका असर??

सिर्फ जानती हूँ क्या  है माँ की कोक 
बाहर मना रहे है लड़की होने का शोक 
टेक्नोलॉजी ना कर पाया इस कुरीति को रोक 

ना तय किया उसके लिए कोई नाम 
पर ये तय कर लिया हासिल करना है उसे कौनसा मुकाम 

खेल खुद से है वो अनजान 
कंप्यूटर की खेल में लगा देते है अपनी जान 

दोस्तों से नहीं होती आमने सामने बात 
बस आभासी दुनिया में ही है सबका साथ 

न रही बचपन न योवन की सुन्दरता 
टेक्नोलॉजी नहीं जानता है कोई भी पहलु की महानता 

गुज़र जाती है युही ज़िन्दगी का सफ़र 
ना रहती है कोई यादों की लहर 

शादी है दो दिलों का अटूट रिश्ता 
वो भी है टेक्नोलॉजी की दुनिया में पिस्ता 

हद हो जाती है जब अपनों का साथ छूटने का ग़म 
टेक्नोलॉजी से ही जताते है शोक अपने ही हुम्दुम 

 समझ नहीं आता हम मशीन है या इन्सां 
टेक्नोलॉजी की दुनिया ही क्यों है अपनी पहचान 
कहाँ खो रहे है अपनेपन के निशाँ???

माना टेक्नोलॉजी है आज की दुनिया की ज़रुरत 
पर क्या वही है इस ज़िन्दगी की वजूद और शाशक???


Friday, February 22, 2013

उदासी 

बुलंद हो कर किया था हमने जो फैसला 
आज टूट रहा है वही होसला 

तरक्की की राह पर उठाये थे जो कदम 
चुकाना पड़ रहा है उसका भारी रकम 

कुछ हासिल करने की थी दिल में छोटी सी आस 
हर पड़ाव पर हो रहे है बस निराश 

कर रहे है हर दिन नया संघर्ष 
काश मिल जाए ज़िन्दगी में उत्कर्ष 

क्या किया था ज़िन्दगी में अपराध कोई घोर 
क्यों दे रहे हो सज़ा चलाके यु ज़िन्दगी का डोर 

न दिखे अब हमे जीने का कारण 
हर कदम पर असफलता से स्वीकार होगा हमे मरण 


Friday, February 8, 2013


ज़िन्दगी.................


लिख रहे है ज़िन्दगी का किताब 
हर दिन हो रहा है एक नया पन्ना बेनकाब 

रोज़ लिखते है अपने लिए अलग कहानी 
पर ज़िन्दगी लेती है अपनी अलग ही राह अनजानी 

ये तो तय कर लिया है क्या करना है हासिल 
पर ना जाने कहाँ मिलेगी हमे हमारी मंजिल 

है कुछ पाने की हम में कशिश 
कर रहे है हर वो कोशिश 

लेकिन हर कोशिश हो रही है नाकामियाब 
है कोई जो खोले हमारी कमजोरी का नकाब?

बनाना है अपने लिए अलग पहचान 
छोड जाना है दुनिया में अपना एक निशान 


Wednesday, February 6, 2013


..............

अच्छे दोस्त होने की शायद मिलती है सज़ा 
सहना पड़ता है दोस्त का गुस्सा 

दिल का है सार कसूर 
अपनों को ही कर देता है मजबूर 

वादा तो करते है निभाने अच्छे बुरे में साथ 
फिर भी बुरा लग जाता है दोस्त का बात 

मॉफी  लफ्ज़ लगने लगता है छोटा 
अपने गलती का घड़ा जो हो जाता है मोटा 

Saturday, January 26, 2013

गणतंत्र  दिवस 

ऐसी देश भक्ति का क्या होगा असर 
जो दिखे सिर्फ स्वतन्त्र और गणतंत्र दिवस पर 

सुन ने मिल रहे है आज देश भक्ति के गीत 
क्या कल भी दिखेगा देश के लिए येही प्रीत??

आज याद आता है हर वो त्याग 
हो जाते है तैयार बस आज ही के दिन करने कुछ भी परित्याग 

ऊँचा लहराए देश का तिरंगा 
देता है चेतावनी न करना कोई भी दंगा 
न लेना भारत वासी से कोई भी पंगा 

हर उस योधा को करते है सलाम 
शत मस्तक होके करते है हर वीर को प्रणाम 

चलाना है देश को उन्नति की राह पर 
हर एक कुरीति को दूर कर 

हर देश वासी से करते है बस एक ही कामना 
हमेशा जागृत रहे देश भक्ति की भावना

Friday, January 25, 2013

साल 2012

वाह क्या गुज़रा ये साल 
दिल में एहसासों का कायम कर गया मिसाल 

इंसान की जो बदली नियत 
चुकाया अपने आंसुओं से उसकी कीमत 

कुछ ऐसों से आशा की थी जो हमने वफ़ा 
आंसू भी हो गए हमसे खफा 

बुने थे दिल से कई रिश्ते 
अब खुश है देख के उनके किश्ते 

दिल को रोज़ यु पिस्ता देख
आये थे दिल में बुरे ख़याल कई अनेक 

उदासी बन गयी थी हमारी पहचान 
हर ज़ख्म का है दिल पर गहरा निशाँ 

जब इंसान की फिदरत ही यु बदल सकती है 
तो क्या वक़्त को बदल ने देर लगती है?

जब जब घम का बादल छाया 
उन्हें सहने की क्षमता भी हमने पाया 

अपने से प्यार करना जब सीखा 
हर दर्द तब से लगने लगा फीखा 

अब समझते है इंसान को परखना 
अपने से ज्यादा न है किसी को रखना 

2012 सिखा गया हमे हिम्मत 
सहने की अब है मुझमे ताकत 
दिखा दूंगी अगर अपनी असलियत 
चुकाना पड़ेगा तुम्हे भारी कीमत