एकता
किस एकता की कर रहे हम बात
जब दिल में नहीं है उस भावना का साथ
क्यों किसी को दोष दे हम
जब हर लड़की डर को साथ लिए बढ़ाती है कदम
ज़ुल्म हज़ारो सहने तैयार
लेकिन नहीं उठाएगी अपने आवाज़ की धार
समाज में आज भी है ऐसी नारी
जो समझती है लड़की की गलती ही होती है भारी
फिर कहते हो " चलो करते है देश का कल्याण?"
हम कहते है "पहले अपनी सोच तो बदलो याजमान"
किस एकता की कर रहे हम बात
जब दिल में नहीं है उस भावना का साथ
क्यों किसी को दोष दे हम
जब हर लड़की डर को साथ लिए बढ़ाती है कदम
ज़ुल्म हज़ारो सहने तैयार
लेकिन नहीं उठाएगी अपने आवाज़ की धार
समाज में आज भी है ऐसी नारी
जो समझती है लड़की की गलती ही होती है भारी
फिर कहते हो " चलो करते है देश का कल्याण?"
हम कहते है "पहले अपनी सोच तो बदलो याजमान"